Home एग्रीकल्चर रुरल इकोनॉमी पासवान ने राज्य सरकारों से की दाल आवंटन में तेजी लाने की अपील
पासवान ने राज्य सरकारों से की दाल आवंटन में तेजी लाने की अपील
पासवान ने राज्य सरकारों से की दाल आवंटन में तेजी लाने की अपील

पासवान ने राज्य सरकारों से की दाल आवंटन में तेजी लाने की अपील

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने राज्य सरकारों से प्रधानमंत्री गरीब अन्न योजना (पीएमजीएवाई) के तहत दाल आवंटन में तेजी लाने की अपील की।

कोरोना वायरस के संक्रमण की कड़ी को तोड़ने के मकसद से देशभर में जारी लॉकडाउन के आर्थिक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने पीएमजीएवाई के तहत देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों में से प्रत्येक लाभार्थी को हर महीने पांच किलो गेहूं या चावल और प्रत्येक राशन कार्ड पर एक किलो दाल मुफ्त अप्रैल से अगले तीन महीने तक देने का प्रावधान किया है। पासवान ने कहा कि महीना बीत गया है, लेकिन राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा सिर्फ 53,617 टन दाल का वितरण ही किया है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों ने अब तक करीब 1.82 लाख टन दालें उठा ली हैं जबकि राज्यों को आवंटन 2.63 लाख टन दालों का किया जा चुका है।

आवंटन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर

उन्होंने कहा कि राज्यों में अनाज पहुंचाने के लिए हर संभव तरीके अपनाए जा रहे हैं। जल मार्ग, सड़क मार्ग सबके माध्यम से यहां तक कि अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में हेलीकॉप्टर से भी दालें आदि भिजवाने का काम किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास खाद्यन्न की किसी तरह की कमी नहीं है। राज्य सरकारों से भी हम बार-बार आग्रह कर रहे हैं कि आपके यहां हम जितना सामान भेज रहे हैं और जितना सामान आपने उठा लिया है उसका जल्द से जल्द आवंटन कर दें।

राज्यों को दालों का प्रसंस्करण कर भेजना आसान नहीं

पासवान ने कहा कि साबूत दालों का प्रसंस्करण करके राज्यों को भेजने की पूरी प्रक्रिया आसान नहीं है फिर भी इस विषम परिस्थिति में राज्यों को दाल मुहैया करवाई गई है, लिहाजा अब उनकी जवाबदेही बनती है कि राज्यों में लाभार्थियों को सही ढंग से वितरण हो। मंत्रालय ने एक बयान में दाल मुहैया करवाने में आई समस्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्यों द्वारा उनकी इच्छा के अनुसार दाल की पंसद बताने में देरी हुई और दूरस्थ स्थानों पर भंडारण होने से परिवहन में कठिनाई आई। जैसे बिहार को अरहर दाल की आपूर्ति तेलंगाना, गुजरात और महाराष्ट्र से होनी थी।

एजेंसी इनपुट