Home एग्रीकल्चर रुरल इकोनॉमी उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए जादुई बनी गन्ने की पर्ची
उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए जादुई बनी गन्ने की पर्ची
उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए जादुई बनी गन्ने की पर्ची

उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए जादुई बनी गन्ने की पर्ची

गन्ना किसानों को 14 दिनों में भुगतान नहीं होने पर ब्याज सहित भुगतान करने की बात कहकर सत्ता में आई भाजपा सरकार गन्ना किसानों के जख्मों पर जितना मरहम लगाने की कोशिश कर रही है, उनकी समस्या उतनी बढ़ती जा रही है। पिछला गन्ना पेराई सीजन का बकाया भुगतान तो अभी तक हुआ नहीं, नए सीजन में किसानों के लिए गन्ने की पर्ची ही जादुई बन गई है। सात निजी कंपनियां आधी अधूरी तैयारियों के साथ पर्चियों का वितरण कर रही हैं, जिस कारण किसान पर्चियों के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं।

प्रदेश में गन्ने की पर्ची का वितरण पहले सोसायटियों के माध्यम से किया जाता था। इसके बाद मिलों ने स्वयं वितरण शुरू कर दिया लेकिन अब भाजपा सरकार ने आधी अधूरी तैयारी के साथ एक बार फिर सोसायटियों के माध्यम से गन्ने की पर्ची का वितरण शुरू किया है।

इन सोसायटियों को काम सौंपने के लिए विभाग की ओर से कागजी कार्यवाही तो पूरी की गई, लेकिन इन कंपनियों के पास न तो प्रशिक्षित स्टॉफ हैं और ना ही ये किसानों को ठीक से सेवाएं दे पा रही हैं। हालांकि विभाग का दावा है कि कार्यदायी संस्थाओं की ओर से वेबसाइट और मोबाइल एप के माध्यम से गन्ना किसानों को गन्ना सर्वे, पर्ची जारी करने आदि के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही एसएमएस पर्ची गन्ना किसानों के मोबाइल पर उपलब्ध होगी, जिसे दिखाने पर तौल को प्राथमिकता दी जाएगी।

बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ चीनी मिल के गन्ना किसान घनश्याम शुक्ला का कहना है कि किसानों को पर्चियां मिलने में बहुत दिक्कतें हो रही हैं। अंबेडकरनगर जिले की तहसील जयसिंहपुर के अलहलादपुर गांव निवासी गन्ना किसान अमित सिंह का कहना है कि पर्ची को लेकर इस वर्ष समस्या ज्यादा हो गई है। वेरायटी में अगेती की पर्ची ज्यादा दे रहे हैं, सामान्य की कम।

आईआईएम लखनऊ ने सर्वे में बताया था होगी परेशानी

आईआईएम लखनऊ ने सितंबर में प्रदेश में चीनी मिलों की दिक्कतें विषय को लेकर एक सर्वे किया था। सर्वे में पर्चियों को समितियों की ओर से जारी करने पर भविष्य में होने वाली दिक्कतों और किसानों को होने वाली परेशानियों के बारे में बताया गया था। इस रिपोर्ट को सरकार को भी सौंपा गया, लेकिन रिपोर्ट पर कार्यवाही नहीं हुई, जिसके परिणाम आज सामने हैं।

किसानों को मिलों के बाहर कई-कई दिन लाईन में लगे रहना पड़ता है

सबसे बड़ी समस्या गन्ने की आवक की है। चीनी मिलों की पेराई क्षमता से ज्यादा गन्ने की आवक हो जाती है, जिस कारण किसानों को मिलों के बाहर ठंड में कई-कई दिन लाईन में लगे रहना पड़ता है। निजी एजेंसियों की ओर से किसानों के गन्ने का सर्वे भी जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) से करने के बजाय डोरी से सर्वे किया गया। जबकि चीनी मिलें टेक्नालॉजी का इस्तेमाल करते हुए जीपीएस सर्वे करती थी।

आंकड़ों में गलती होने पर आपत्तियां की जा सकती हैं

ज्वाइंट केन कमिश्नर वीबी सिंह का कहना है कि 41 गन्ना समितियां बिना मुख्यालय के सहयोग के खुद इसी पैटर्न पर कार्य कर रही थी। उसी को और व्यवस्थित रूप से हमने लागू किया है। जिसका परिणाम है कि गन्ना माफिया मारे-मारे फिर रहे हैं, लेकिन उन्हें गन्ने की पर्ची नहीं मिल पा रही है। शुरूआत में कुछ चीनी मिलों ने डाटा नहीं दिया था। इसलिए सर्वे में दिक्कत आई थी, लेकिन अब इसे हमने सही कर लिया है। आंकड़ों में गलती होने पर आपत्तियां की जा सकती हैं। व्यवहारिक समस्याओं का निदान किया जा रहा है। उनका कहना है कि भविष्य में सोसायटी को कंप्यूटराईज्ड कर मॉडल साफ्टवेयर लगायेंगे। आउटसोर्स के माध्यम से डाटा इंट्री आपरेटर रखेंगे और सर्वे के काम को सीधे सर्वर से जोड़ा जाएगा।

किसानों को गन्ने की पर्चियां नहीं मिल रही

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई है। बकाया भुगतान हुआ नहीं। इतनी झूठी सरकार कभी नहीं आई। किसानों को गन्ने की पर्चियां नहीं मिल रही हैं। भाजपा नेताओं की जेब में किसानों की पर्चियां हैं।

 अवैध गन्ना खरीदने वाले हैं परेशान 

राज्य के गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने बताया कि प्रदेश में गन्ना माफिया की कमर हमने तोड़ दी है। अवैध गन्ना खरीदने वाले परेशान हैं। हमने व्यवस्था को पारदर्शी बनाया है। यदि फिर भी कोई समस्या आती है तो हमने हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत कर सकते हैं। हमनें समितियों के सचिवों को निर्देश दे रखे हैं कि वे 11 से 1 बजे तक रोजाना समितियों पर बैठें और किसानों की समस्याओं का निराकरण करें। किसानों की हर समस्या का समाधान करने के लिए सरकार सजग है। सरकार को पौने दो साल हो गए हैं, इस दौरान हम पर पौने दो रुपये का आरोप कोई नहीं लगा सकता।