Home एग्रीकल्चर रुरल इकोनॉमी टिड्डियों का राजस्थान के 11 जिलों में असर, राज्य सरकार ने गिरदावरी के दिए आदेश
टिड्डियों का राजस्थान के 11 जिलों में असर, राज्य सरकार ने गिरदावरी के दिए आदेश
टिड्डियों का राजस्थान के 11 जिलों में असर, राज्य सरकार ने गिरदावरी के दिए आदेश

टिड्डियों का राजस्थान के 11 जिलों में असर, राज्य सरकार ने गिरदावरी के दिए आदेश

राजस्थान के किसान बीते लगभग तीन दशक के सबसे बड़े टिड्डी दल हमले का सामना कर रहे हैं। राज्य के 11 जिले इस हमले से प्रभावित हैं। राज्य सरकार ने प्रभावित इलाकों में विशेष गिरदावरी का आदेश दिया है।

राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार हमेशा की तरह इस बार भी इन टिड्डी दलों का सबसे अधिक असर पाकिस्तानी सीमा से लगते जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर जिलों में है। थार रेगिस्तान का यह इलाका पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सामने पड़ता है और टिड्डी दल हवाओं के रुख के साथ इसी सीमा से होकर भारत में आते हैं। एक टिड्डी दल में हजारों-लाखों की संख्या में टिड्डियां होती हैं और जहां भी यह पड़ाव डालता है, वहां फसलों व अन्य वनस्पतियों को चट करता हुआ चला जाता है।

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीते लगभग आठ महीने में राज्य के 11 जिलों में लगभग 3.70 लाख हेक्टेयर जमीन में दवाइयों का छिड़काव किया जा चुका है। इसमें सबसे अधिक प्रभावित जैसलमेर जिले में दो लाख हेक्टेयर, बाड़मेर व बीकानेर में 80,000-80,000, गंगानगर जिले में 5,000 हेक्टेयर, जालौर में 1,500 हेक्टेयर, हनुमानगढ़ जिले में 800 हेक्टेयर, नागौर जिले में 500 हेक्टेयर, सिरोही और पाली में 400-400 हेक्टेयर और डूंगरपुर जिले में 50 हेक्टेयर जमीन में छिड़काव किया जा चुका है।

लगभग 3.50 लाख हेक्टेयर जमीन में हो चुका है दवा का छिड़काव

टिड्डी नियंत्रण के लिए नोडल अधिकारी एवं कृषि विभाग में संयुक्त निदेशक (पौध संरक्षण) डॉ. सुआलाल जाट ने कहा कि इस बार पहला टिड्डी दल 21 मई 2019 को देखा गया था। उसके बाद से 12 जनवरी तक लगभग 3.50 लाख हेक्टेयर जमीन में दवाईयों का छिड़काव किया जा चुका है है। विभाग की 54 सर्वे टीम निगरानी व नियंत्रण के काम में लगी हैं और 45 माइक्रोनियर मशीनें नियंत्रण के लिए काम में लगी हुई हैं। 450 ट्रैक्टर स्प्रेयर के साथ काम में लगे हैं। इसके अलावा प्रभावित जिलों में किसानों के सहयोग से हर दिन 400 से 450 ट्रैक्टरों की मदद से टिड्डी दलों को भगाने की कोशिश की जाती है, ताकि वे फसलों को नुकसान नहीं पहुंचा सकें।

प्रभावित इलाके में 2.60 लाख लीटर दवा छिड़की जा चुकी है

अधिकारियों के अनुसार प्रभावित इलाके में अब तक 2.60 लाख लीटर दवा (मेलाथियान) छिड़की जा चुकी है। टिड्डी दल का हमला राजस्थान के इन सीमावर्ती जिलों में हर साल होता है लेकिन इसका असर कम-ज्यादा होता रहता है। इस बार पहला टिड्डी दल 21 मई 2019 को देखा गया था यानी ये दल लगभग आठ महीने से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रही हैं। आमतौर पर टिड्डी दल इतने लंबे समय तक सक्रिय नहीं रहते और प्रभावित इलाके के हिसाब से भी कम से कम बीते तीन दशक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है।

इससे पहले वर्ष 1993 में टिड्डी दलों ने पहुंचाया था भारी नुकसान

अधिकारी ने कहा कि यह इससे पहले जुलाई-अक्टूबर 1993 में टिड्डी दलों ने राजस्थान में बड़ा हमला किया था और हजारों हेक्टेयर में फसल और वनस्पति को चट कर दिया था। उस साल कृषि विभाग ने 3,10,482 हेक्टेयर जमीन में दवाईयों का छिड़काव किया था जबकि इस बार 3.70 लाख हेक्टेयर में तो पहले ही छिड़काव किया जा चुका है, लेकिन खतरा अभी बरकरार है। उन्होंने कहा कि टिड्डियों का हमला एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है। इस पर काबू पाने के लिए उसी स्तर पर सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।

ग्रीष्म प्रजनन सीजन शुरू होने वाला है, इसलिए खतरा अभी भी बरकरार है

ये टिड्डी दल कई देशों से होते हुए यहां पहुंचते हैं। टिड्डी नियंत्रण संगठन (एलडब्ल्यूओ) के जोधपुर स्थित मुख्यालय में उपनिदेशक के एल गुर्जर ने कहा कि राजस्थान में टिड्डी दलों का यह हमला अपनी तरह का अब तक का सबसे बड़ा है। इससे पहले राजस्थान में 1993 में इस तरह का हमला हुआ था लेकिन प्रभावित इलाके के हिसाब से आंकड़ा इस बार पहले की तुलना में ज्यादा हो चुका है। उन्होंने कहा कि ईरान सहित खाड़ी के अन्य देशों और पाकिस्तान में टिड्डी दल अब भी बड़ी संख्या में सक्रिय हैं। इनका ग्रीष्म प्रजनन सीजन शुरू होने वाला है, इसलिए खतरा बरकरार है।

प्रभावित किसानों को तीन दिन में मुआवजा राशि का होगा वितरण

राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने टिड्डी प्रभावित जिलों में की जा रही विशेष गिरदावरी रिपोर्ट जल्दी भिजवाने और तीन दिन में प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि का वितरण शुरू करने के निर्देश दिए हैं। गहलोत ने शनिवार को टिड्डी प्रभावित जिलों के कलेक्टरों के साथ हालात की समीक्षा की थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार टिड्डी प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को हुए नुकसान को लेकर गंभीर है और किसानों को तत्काल राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पहले गहलोत ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर टिड्डी प्रकोप पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की थी।