Home एग्रीकल्चर रुरल इकोनॉमी अमेरिका से प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में किसान संगठन 17 फरवरी को करेंगे देशव्यापी प्रदर्शन
अमेरिका से प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में किसान संगठन 17 फरवरी को करेंगे देशव्यापी प्रदर्शन
अमेरिका से प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में किसान संगठन 17 फरवरी को करेंगे देशव्यापी प्रदर्शन

अमेरिका से प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में किसान संगठन 17 फरवरी को करेंगे देशव्यापी प्रदर्शन

देश के करोड़ों किसानों के हितों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय किसान महासंघ ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे के दौरान प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में 17 फरवरी को देशव्यापी प्रदर्शन करने का फैसला किया है।

राष्ट्रीय किसान महासंघ के शिव कुमार कक्काजी ने बताया कि अमेरिका, अपने कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए भारत से व्यापारिक समझौते का दबाव बना रहा है, जिसका असर देश के करोड़ों किसानों पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इस समझौते को नहीं करने का आग्रह करने के लिए हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इससे किसानों को होने वाले नुकसान के बारे में सरकार को आगाह करेंगे। इसके विरोध में 17 फरवरी को 200 से ज्यादा जिला मुख्यालयों पर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जायेगा।

अमेरिका कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए नए बाजार ढूंढ रहा है

फरवरी के अंत में अमेरिका के राष्ट्रपति भारत के दौरे पर आ रहे हैं और अमेरिका, भारत के बीच व्यापारिक समझौता उनके एजेंडे में शीर्ष पर है। अपने कृषि क्षेत्र को बचाने के लिए अमेरिका कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए नए बाजार ढूंढ रहा है। 2019 में अमेरिका ने भारत के साथ जीएसपी करार रद्द कर दिया था जिसके तहत बिना किसी निर्यात शुल्क के भारत 6 बिलियन डॉलर के उत्पाद अमेरिका भेजता था। इसके बदले में भारत ने 28 अमेरिकी उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया था। सूत्रों के अनुसार जीएसपी के तहत दोबारा से छूट देने के लिए अमेरिका, भारत के साथ नए व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बना रहा है जिसके तहत लगभग 42,000 करोड़ रुपये के कृषि उत्पादों का निर्यात अमेरिका, भारत को करना चाहता है।

दूध उत्पादों, सेब, अखरोट, बादाम, सोयाबीन, गेहूं तथा मक्का का निर्यात बढ़ने की आशंका

13 नवम्बर 2019 को भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि रोबर्ट लाइटहाइजर के बीच मुलाकात हुई थी जिसमें व्यापार समझौते पर शुरुआती चर्चा हुई थी। पिछले साल नवंबर महीने के तीसरे हफ्ते में अमेरिका के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल ने भारत का दौरा किया था। इस दौरे के दौरान भारत और अमेरिका व्यापार समझौते पर विस्तृत चर्चा की गई थी। राष्ट्रीय किसान महासंघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर हो गए तो दूध उत्पादों, सेब, अखरोट, बादाम, सोयाबीन, गेहूं तथा मक्का का आयात बहुत कम आयात शुल्क पर भारत में किया जाएगा जिसके गंभीर दुष्परिणाम देश के किसानों को झेलने पड़ेंगे।

देश के किसान पहले ही अधिकांश उत्पाद एमएसपी से नीचे बेचने पर मजबूर

उन्होंने कहा कि हमारे देश का किसान अमेरिका के किसानों के साथ मुकाबला नहीं कर सकते हैं। अमेरिका ने 2014 के कृषि बिल में 10 सालों के लिए सब्सिडी हेतु 956 बिलियन डॉलर की राशि आवंटित की थी जबकि 2019 के कृषि बिल में इस सब्सिडी राशि को बढ़ाकर आगामी चार वर्षों के लिए 867 बिलियन डॉलर कर दिया। भारत सरकार ने 2020-21 के आम बजट में कृषि, ग्रामीण व सिंचाई के क्षेत्र के लिए मात्र 2.8 लाख करोड़ रुपये ही आवंटित किए हैं। देश का किसान पहले अपने अधिकांश उत्पादों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बेचने को मजबूर है। देश के ज्यादातर किसान पहले ही कर्ज तले दबे हुए हैं, ऐसे में अगर अमेरिका से व्यापार समझौता हो गया तो देश के किसान भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध से कृषि उत्पादों के निर्यात पर पड़ा असर

अमेरिका व चीन के बीच व्यापार युद्ध व अमेरिका में बढ़ते कृषि उत्पादन और घटते कृषि निर्यात की वजह से अमेरिका के कृषि क्षेत्र पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अमेरिका का कृषि निर्यात कम होने की वजह से घरेलू बाजार में कृषि उत्पादों के दाम गिर गए हैं। कृषि निर्यात में वृद्धि करने के लिए अमेरिका ने कोलंबिया, पनामा और दक्षिण कोरिया के साथ नए व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं तथा इसी कड़ी में भारत से भी व्यापारिक समझौता करना उसकी प्राथमिकता में है।