Home एग्रीकल्चर रुरल इकोनॉमी किसान संगठनों ने राजनैतिक दलों से अपनी 18 मांगों को घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग की
किसान संगठनों ने राजनैतिक दलों से अपनी 18 मांगों को घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग की
किसान संगठनों ने राजनैतिक दलों से अपनी 18 मांगों को घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग की

किसान संगठनों ने राजनैतिक दलों से अपनी 18 मांगों को घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग की

किसानों ने पूर्ण कर्जमाफी के साथ ही फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागत का डेढ़ गुना तय करने के साथ ही किसानों की न्यूनतम आय सुनिश्चित करने जैसे मांगों को सभी राजनैतिक दलों से अपने घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग की। किसान आंदोलन की अखिल भारतीय समन्वय समिति ने दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में राजनैतिक संगठनों से अपनी 18 मांगों को तय समय सीमा में क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की भी मांग की।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि हमारी सभी राजनीतिक दलों से मांग है कि किसानों के मुद्दों को अपने घोषणा पत्र में तो शामिल करे ही, साथ ही समय से लागू की जाए। उन्होंने कहा कि हमारी मांगों में मुख्यतय: फसलों के एमएसपी सी2 फार्मूले के आधार पर तय किए जाए, साथ ही फल, सब्जियों और दूध के दाम भी उत्पादन लागत के डेढ़ गुना जोड़कर घोषित किए जाए। सभी किसानों की पूर्ण कर्जमाफी हो। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ कंपनियों के बजाए किसानों को मिलें, तथा इसमें किसान को यूनिट की तरह माना जाए।

किसानों को 60 साल के बाद पेंशन दी जाए

उन्होंने कहा कि किसानों की न्यूनतम आय सुनिश्चित की जाए एवं 60 साल के बाद किसान को हर महीने कम से कम 5 हजार रुपये प्रति महीना पेंशन दी जाए। उन्होंने कहा कि जंगली एवं आवारा पशुओं से खेती की सुरक्षा की जाए। गन्ना किसानों के बकाया का भुगतान तत्काल ब्याज सहित भुगतान किया जाए।

खेती को मनरेगा से जोड़ने की मांग

अखिल भारतीय समनव्य समिति के प्रवक्ता युद्धवीर सिंह ने कहा कि पिछले दस सालों में करीब तीन हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं, जोकि देश के लिए शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवारों को पुनर्वासित किया जाए, साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। सभी किसानों को ट्यूबवेल से सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली मुहैया कराई जाए। इसके अलावा मनरेगा को कृषि के साथ जोड़ा जाना चाहिए। इसके अलावा किसानों से कृषि उपकरणों को जीएसटी के दायरे से बाहर करने जैसी और भी अन्य मांगों को घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग की।

मुक्त व्यापार समझौते का बहिष्कार करने की मांग

किसान संगठनों ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) के तहत मुक्त व्यापार समझौते जिसमें भारत सहित अन्य 16 देश जिनमें चीन, आस्ट्रेलिया के साथ 10 आसियान देश शामिल है, के साथ की जा रही बातचीत का बहिष्कार किया है। आरसीईपी समझौता से सस्ते आयात के लिए दरवाजे खुल जायेंगे, जिससे पहले से ही संकट से जूझ रहे कृषि क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।