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किसान आयोग को मिलना चाहिए संवैधानिक दर्जा
किसान आयोग को मिलना चाहिए संवैधानिक दर्जा

किसान आयोग को मिलना चाहिए संवैधानिक दर्जा

देश में किसानों की आर्थिक और सामाजिक उन्नति के लिए दिग्गजों ने लखनऊ में मंथन किया। इसमें कई अच्छे सुझाव आए तो समस्याओं का भी जिक्र हुआ। तय हुआ कि किसानों की उन्नति के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन हो और उसे संवैधानिक शक्ति प्रदान हो, ताकि किसान अपनी समस्या कम से कम एक फोरम पर उठा सकें और उनका निवारण भी हो सके।

कार्यक्रम का आयोजन किसान विचार मंच ने गोमतीनगर स्थित एसकेडी एकेडमी में किया था। विषय था किसानों की समस्या और समाधान किसान प्रतिनिधि सम्मेलन। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किसानों की दुखती रग पर हाथ रखते हुए कहा कि किसानों की ताकत को आपने बांट दिया है। कहां से चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत पैदा होंगे। आज आपमें ताकत ही नहीं है कि आप चौ़ चरण सिंह पैदा कर सकें। एक समय था जब सरकारें किसानों के दर पर उनकी समस्या सुनती थीं।

उन्होंने कहा कि मैंने किसान आयोग का गठन किया था। अगर किसानों के साथ कोई पॉलिसी डिफाल्ट हो तो उसे उचित फोरम तक पहुंचाने के लिए किसान आयोग बनना चाहिए और उसे संवैधानिक शक्ति मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को सीमित लोन दो, लेकिन एक या दो फीसदी से अधिक ब्याज दर नहीं होनी चाहिए। किसानों को एकजुट होने की नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि यूनियनें तो बन जाती हैं, समाज में परिवर्तन के लिए कार्य नहीं करते। गैस की कीमत पर प्राइज कंट्रोल नहीं है, किसानों के उपज पर है। किसानों को भी दाम तय करने का हक है। एक स्पष्ट आवाज उठनी चाहिए। गलत को तो गलत कहना पड़ेगा।

एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट और कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) के पूर्व चेयरमैन डॉं.टी हक ने कहा कि सरकार अपने तरफ से किसानों की बेहतरी के लिए पहल कर रही है, लेकिन यह बिना सभी के सहयोग के संभव नहीं होगा। आपको भी अपनी तरफ से पहल करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दुगुनी करने के लिए एक लाख 30 हजार करोड़ अतिरिक्त निवेश चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के रुप में नहीं होना चाहिए था, बल्कि इनकम का इंश्योरेंस होना चाहिए था।

कार्यक्रम को पाक्षिक समाचार पत्रिका आउटलुक के संपादक हरवीर सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि सभी के सामने एक ही समस्या है। उन्होंने गन्ने के बकाया भुगतान के बारे में कहा कि किसानों का हाल यह है कि पिछले साल का भुगतान नहीं मिला, इस साल का पता नहीं और अगले साल इस उम्मीद में हैं कि रेट बढ़ेगा। इस विचारधारा से किसानों को निकलना पड़ेगा।

उन्होंने मुंबई में हुए किसानों के आंदोलन के बारे में कहा कि किसानों की करीब 80 फीसदी डिमांड सिर्फ आश्वासन पर ही खत्म हो गई। जिस देश में आश्वासन समिति हो उस देश का क्या होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले 70 सालों में किसानों के लिए कुछ नहीं बदला है। सरकार आज भी दुविधा में है, कैसे रास्ता निकले। उन्होंने किसानों को बल्क में खरीदारी और फुटकर में बिक्री करने की भी सलाह दी। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने के लिए लागत में कमी पर भी जोर दिया।

पूर्व राज्यसभा सांसद मो. अदीब ने कहा कि मैंने मेहनत की तो माइनॉरिटी आयोग बन गया। आप भी मेहनत करो देश बचाओ, किसान आयोग बनाओ का नारा बुलंद करो।

कार्यक्रम की अध्यक्षता बाबा हरदेव सिंह पूर्व आईएएस अधिकारी उत्तर प्रदेश सरकार ने की और संचालन किसान प्रतिनिधि सम्मेलन के संयोजक मानवेंद्र वर्मा ने किया। कार्यक्रम को पूर्व एमएलसी राजकुमार त्यागी, पूर्व मंत्री मदन चौहान, भूमि सुधार निगम के जेएमडी डॉं. एस के सिंह, पूर्व आईएएस राकेश कुमार मिश्रा आदि ने भी संबोधित किया।