Home एग्रीकल्चर रुरल इकोनॉमी कोरोना वायरस : किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र 1.5 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज दे - भाकियू
कोरोना वायरस : किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र 1.5 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज दे - भाकियू
कोरोना वायरस : किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र 1.5 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज दे - भाकियू

कोरोना वायरस : किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र 1.5 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज दे - भाकियू

कोरोना वायरस के कारण देशभर में चल रहे लॉकडाउन के कारण फल, सब्जी, दूध, पोल्ट्री, मछली, मधुमक्खी और फूलों की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान हुआ है। राज्यों की सीमाएं बंद होने के कारण किसान अपने उत्पाद बाजार में बेच नहीं पाए, जिससे इन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, इसलिए केंद्र सरकार इनकी भरपाई के लिए डेढ़ लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज दे।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर लॉकडाउन से प्रभावित किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग की है। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया कि कोविड-19 महामारी के चलते देशभर में लाॅकडाउन लगाना पड़ा जोकि देशहित में अच्छा कदम है। उन्होंने कहा कि लाॅकडाउन की घोषणा उस समय करनी पड़ी जब किसान रबी की कटाई एवं खरीफ की बुवाई की तैयारी कर रहा था। असमय बारिश के कारण किसानों की फसलों की कटाई भी 15 दिन लेट हो चुकी थी। लाॅकडाउन की घोषणा के बाद किसानों की फसलों की कटाई हेतु मजदूर मिलना मुश्किल हो गया। जिसके चलते किसानों को सामने भारी संकट का सामना करना पड़ा।

लॉकडाउन के कारण फलों के साथ ही सब्जियां खेतों में ही सड़ गई

उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के कारण सीमाएं बंद होने की वजह से परिवहन के साधन बंद हो गए। जिस कारण किसानों की फल, सब्जी या तो खेत में सड़ गयी थी या उनके भाव नहीं मिल पा रहे। बहुत से किसानों को अपनी फसलें फेंकनी पड़ी। देश के अधिकांश राज्यों के किसानों को टमाटर, लौकी, तुरई, खीरा, अंगूर, संतरा, लोकाट तथा लीची आदि को फेंकना पड़ रहा है। जिस कारण किसानों के पास खरीफ फसलों की बुवाई का आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

देश किसानों के दम पर ही कोरोना वायरस जैसी महामारी से लड़ पा रहा है

देश का किसान इस समय असमंजस में है कि आखिर उनकी समस्या सुलझाने के लिए राज्य सरकारों के साथ ही केंद्र द्वारा आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए जा रहें हैं? लाॅकडाउन के चलते सब्जियों व फल के किसानों को 80 फीसदी, फूल किसानों को 100 फीसदी व दूध के किसानों को 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है। देश पर आये इस संकट को टालने में किसान जान हथेली पर रखकर खेत में कार्य कर रहा है तथा देश किसानों के दम पर ही कोरोना वायरस जैसी महामारी से लड़ पा रहा है। अगर देश में खाद्य सुरक्षा न होती तो कोरोना वायरस के मुकाबले भूख से ज्यादा मौत हो चुकी होती।

पीएम-किसान सम्मान राशि को 6 हजार से बढ़ाकर 24 हजार रुपये किया जाए

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि लाॅकडाउन के कारण फल, सब्जी, दूध, पोल्ट्री, मछली, मधुमक्खी और फूलों के किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार द्वारा अविलम्ब 1.5 लाख करोड़ का पैकेज दे। किसान सम्मान निधि का लाभ पहली किश्त की तरह सभी किसानों को दे साथ ही किसान सम्मान निधि की राशि को सालाना 6 हजार रुपये से बढ़ाकर 24 हजार रुपये किया जाए। किसानों की सभी तरह की फसलें कपास, गेंहू, चना, सरसों, सब्जियों आदि की खरीद की जाए। लम्बे समय से मौसम की मार झेल रहे किसानों को गेंहू पर 200 रुपये क्विंटल का बोनस दिया जाए। किसानों के सभी तरह के कर्ज के ब्याज पर एक साल की छूट व खरीफ की बुवाई में खाद, बीच की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। फल, सब्जी, फूल उत्पादक किसानों के फसली ऋण माफ किए जाए। देश में अन्न की आत्मनिर्भरता के साथ-साथ दलहन व खाद्य तेल में भी देश को आत्मनिर्भर बनाया जाए। कृषि आयात पर देश की निर्भरता को समाप्त करने हेतु खाद्य तेल व दलहन उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर उनकी फसलों की सरकारी खरीद की जाए।