Home एग्रीकल्चर रुरल इकोनॉमी सहकारी समि‌तियां बीमार, सार्वजनिक उपक्रमों के संचालन के लिए आगे आये-अतिरिक्त कृषि सचिव
सहकारी समि‌तियां बीमार, सार्वजनिक उपक्रमों के संचालन के लिए आगे आये-अतिरिक्त कृषि सचिव
सहकारी समि‌तियां बीमार, सार्वजनिक उपक्रमों के संचालन के लिए आगे आये-अतिरिक्त कृषि सचिव

सहकारी समि‌तियां बीमार, सार्वजनिक उपक्रमों के संचालन के लिए आगे आये-अतिरिक्त कृषि सचिव

सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के कई उपक्रमों के विनिवेश के पक्ष में है, ऐसे समय में सहकारी समि‌तियों के लिये यह अच्छा समय है कि वे सरकार को इनको चलाने के लिये अच्छी योजना लेकर आये। अतिरिक्त कृषि सचिव वसुधा मिश्रा ने अन्तर्राष्ट्रीय सहकारी अलायेंस एशिया पैसिपिक (आईसीएएपी) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ द्वारा संचा‌लित  सहकारी समि‌तियों के व्यवसाय बढ़ाने में लैंगिक समानता के विषय पर आयोजित कार्यशाला के समापन समारोह में कहा कि सार्वजनिक उपक्रम काफी दबाव में हैं, ऐसे में यह अच्छा समय है कि सहकारी समि‌तियां अपनी क्षमता लेकर देश की आर्थिक व्यवस्था में आगे आयें।

सहकारी समि‌तियां ज्यादा से ज्यादा एफपीओ का गठन करें

उन्होंने कहा कि सहकारिता का माडल जो सतत और समावेशी विकास पर आधारित है, उसकी महत्ता आज और भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि सरकार सहकारी समि‌तियों की स्थिति को सुधारने के लिए काफी इच्छुक है। उन्होंने कहा कि वैसे तो किसानों के कल्याण के लिये कई स्कीमें हैं, लेकिन सहकारी समि‌तियों के लिए एैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय को दुगुना करने के लिये सरकार किसान उत्पादक संघ (एफपीओ) को बढ़ावा दे रही है। इसलिए यह अच्छा मौका है कि सहकारी समि‌तियां एफपीओ बनायें। महिलाओं के प्रति लैंगिक भेदभाव और यौन हिंसा को खत्म करने के लिए उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में सहकारी समि‌तियों के लिए बहुराज्य‍ीय सहकारी स‌मि‌ति अधिनियम में संशोधन ला रही है।

सहकारी समि‌तियों से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने की जरूरत

आईसीएपी के महानदिशक बालू अय्यर ने कहा कि स्टार्ट-अप के दौर में हमें सहकारी समि‌तियों को स्टार्ट-अप के रूप में देखना होगा और उन्हें ज्यादा से ज्यादा युवाओं से जोड़ना होगा। भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ के मुख्य कार्यकारी एन सत्यनारायण ने कहा कि सहकारी समि‌तियों में लैंगिक समानता लाने की बहुत आवश्यकता है ताकि किसानों की आय दुगुनी की जा सके। उन्होंने आगे कहा कि संघ की महिला क्षेत्रीय परियोजनाओं ने लैंगिक समानता के आधार पर विगत कुछ वर्षों में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है।