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मध्य प्रदेश में बंजर भूमि पर काजू की खेती, राज्य सरकार दे रही है किसानों को मदद
मध्य प्रदेश में बंजर भूमि पर काजू की खेती, राज्य सरकार दे रही है किसानों को मदद

मध्य प्रदेश में बंजर भूमि पर काजू की खेती, राज्य सरकार दे रही है किसानों को मदद

मध्य प्रदेश में किसानों की माली हालत सुधारने के लिए राज्य सरकार नवाचारों पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में बंजर पड़ी भूमि पर 'काजू की खेती' को प्रोत्साहित किया जा रहा है और यह किसानों को भी रास आने लगी है। राज्य के लगभग 1,430 हेक्टेयर में किसानों ने काजू के 1.60 लाख पौधे लगाए हैं।

राज्य के उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार काजू और कोको विकास निदेशालय, कोच्चि (केरल) ने राज्य के बैतूल, छिन्दवाड़ा, बालाघाट और सिवनी जिले की जलवायु को काजू की खेती के लिए उपयुक्त पाया है। इसी के चलते इन जिलों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना 'रफ्तार' के माध्यम से इस वर्ष काजू क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम को लागू किया गया है। इन जिलों में अभी तक किसानों ने कुल 1,430 हेक्टेयर में काजू के 1.60 लाख पौधों का रोपण किया है इसके अलावा 1.26 लाख पौधे और उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

आधिकारिक ब्योरे के अनुसार अब तक बैतूल में 1,000 किसानों ने, छिंदवाड़ा में 30, बालाघाट और सिवनी में 200-200 किसानों ने अपनी जमीन पर काजू के पेड़ लगाए हैं। औसतन सभी किसानों ने एक-एक हेक्टेयर क्षेत्र में काजू की खेती की है। एक हेक्टेयर क्षेत्र में 200 पेड़ रोपे गए हैं, प्रति पेड़ के बीच की दूरी सात मीटर की होती है।

कृषि विशेषज्ञों की मानें तो काजू के एक पेड़ से औसतन 15 किलो काजू मिलता है। इस तरह एक हेक्टेयर में 200 पेड़ से कुल 3,000 किलो काजू मिल सकता है। राज्य के कृषि मंत्री सचिन यादव का कहना है किसानों को नगदी फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। काजू की खेती भी उसी दिशा में बढ़ाया गया एक कदम है।

एजेंसी इनपुट