Home एग्रीकल्चर रुरल इकोनॉमी बजट पूर्व परिचर्चा में किसान प्रतिनिधियों को शामिल नहीं करना सरकार की विरोधी मानसिकता-एआईकेएस
बजट पूर्व परिचर्चा में किसान प्रतिनिधियों को शामिल नहीं करना सरकार की विरोधी मानसिकता-एआईकेएस
बजट पूर्व परिचर्चा में किसान प्रतिनिधियों को शामिल नहीं करना सरकार की विरोधी मानसिकता-एआईकेएस

बजट पूर्व परिचर्चा में किसान प्रतिनिधियों को शामिल नहीं करना सरकार की विरोधी मानसिकता-एआईकेएस

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आयोजित 11 जून 2019 को बजट पूर्व परिचर्चा में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं करना, एनडीए सरकार का किसान विरोधी होना दर्शाता है। खेती-किसानी से जुड़े किसान संगठनों के अलावा ग्रामीण समुदाय से जोकि लोगों के लिए खाद्यान्न का उत्पादन करते हैं उन्हें बैठक में बुलाया ही नहीं गया। इस बैठक में नौकरशहों के अलावा बड़े बागान मालिकों और अमीर किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले केवल दो संगठनों को को ही बुलाया गया। 

अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) इस किसान विरोधी कदम पर अपना कड़ा विरोध व्यक्त करती है और मांग करती है कि राजग सरकार अखिल भारतीय स्तर पर काम कर रहे विभिन्न किसान और कृषि कार्यकर्ता संगठनों के प्रतिनिधियों को बुलाएगी। खेती किसानी से जुड़े संगठनों से विचार करने पर ही बजट को तैयार करने में मदद मिलेगी। जिससे तीव्र कृषि संकट को हल करने के लिए वास्तविक प्रस्तावों को शामिल किया जा सके और ऋण संकट के साथ ही किसानों में बढ़ रही आत्महत्याओं की व्यापक प्रवृत्ति को रोका जा सके।

खेती योग्य भूमि का अधिग्रहण रोकने की मांग

एआईकेएस कृषि और ग्रामीण विकास के हल के लिए बजट आवंटन बढ़ाने की मांग करता है ताकि किसानों की आर्थिक हालात सुधारी जा सके। किसानों की दशा सुधारने के लिए केंद्र सरकार को कृषि भूमि के अधिग्रहण को रोकना होगा, साथ ही वन अधिकार अधिनियम को सख्ती से लागू करना होगा। कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा जनजातीय भूमि को अंधाधुंध छीनना बंद करने के साथ ही किरायेदार किसानों के अधिकारों की रक्षा करना भी है। बजट में किसानों के ऋण माफी के पैकेज को शामिल करना है जिससे किसानों को कर्ज मुक्त किया जाए। इसके साथ ही किसानों की आत्महत्याओं को रोकने के लिए उचित कदम उठाना शामिल है। आत्महत्या कर चुक किसानों के पीड़ित परिवारों को 10 लाख मुआवजा दिया जाये।

एमएसपी लागत को 50 फीसदी तय करने की मांग

एआईकेएस के अनुसार सरकार को छोटे और सीमांत किसानों, कृषकों, किरायेदार किसानों, कृषि श्रमिकों और छोटे किसानों को ब्याज मुक्त कृषि ऋण प्रदान करना है। कृषि ऋण की ब्याज दर को भी 4 फीसदी करने की मांग की। इसके साथ ही एम एस स्वामीनाथन आयोग द्वारा तय सिफारिश के आधार पर सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागत का 50% तय किया जाए। एआईकेएस ने मांग की है कि सभी किसानों से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा फसलों की खरीद सुनिश्चित की जाए।

मनरेगा में 200 दिन का काम सुनिश्चित करने की मांग

एआईकेएस मनरेगा के उचित कार्यान्वयन, प्रति वर्ष 200 दिनों के काम और मजदूरी को ठीक करने की मांग करता है, जो प्रति दिन 500 रुपये से कम नहीं हो। एआईकेएस सभी फसलों के फसल बीमा की मांग करता है और प्राकृतिक आपदा, जंगली जानवरों के हमलों और फसल रोगों के कारण फसल के नुकसान के लिए पूर्ण मुआवजे और मुआवजे का आकलन करने के लिए गांव को इकाई को मानने की मांग की।