Home एग्रीकल्चर पालिसी गन्ना बकाया के ब्याज भुगतान की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश में किसानों ने किया प्रदर्शन
गन्ना बकाया के ब्याज भुगतान की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश में किसानों ने किया प्रदर्शन
गन्ना बकाया के ब्याज भुगतान की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश में किसानों ने किया प्रदर्शन

गन्ना बकाया के ब्याज भुगतान की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश में किसानों ने किया प्रदर्शन

गन्ना के बकाया पर ब्याज की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश के सभी गन्ना उत्पादक जिलों में किसानों ने धरना दिया।। राज्य सरकार ने घाटे वाली मिलों को सात फीसदी और मुनाफे वाली मिलों को 12 फीसदी ब्याज देने का फैसला किया था, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह ने बताया कि सभी गन्ना उत्पादक जिलों के साथ ही लखनऊ में गन्ना आयुक्त कार्यालय में धरना दिया। धरने के बाद हर जिला अध्यक्ष ने राज्य के मुख्यमंत्री को बकाया पर ब्याज के भुगतान के लिए पत्र लिखा। उन्होंने बताया कि अदालती आदेश के बावजूद गन्ना किसान पिछले कई वर्षों के दौरान बकाए के भुगतान में देरी की अवधि के ब्याज की मांग कर रहे हैं।

राज्य के 40 लाख गन्ना किसानों का मिलों पर बकाया ब्याज

वीएम सिंह ने बताया कि राज्य के 40 लाख गन्ना किसानों के बकाया पर ब्याज की मांग को लेकर हमने उत्तर प्रदेश के गन्ना राज्य मंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि हमने 15 फीसदी ब्याज देने की मांग की थी जबकि सरकार ने घाटे वाली चीनी मिलों को सात फीसदी और मुनाफे वाली चीनी मिलों को 12 फीसदी ब्याज देने का फैसला किया है। इस पर अदालत में आपत्ति भी जताई गई है तथा सात फीसदी और 12 फीसदी ब्याज देने के सरकार के फैसले को भी अभी तक लागू नहीं किया गया है। हमारी मांग है कि राज्य सरकार इस फैसले को तत्काल लागू करवाये।

उन्होंने कहा कि राज्य के गन्ना आयुक्त संजय भूसरेड्डी द्वारा किसानों को ब्याज भुगतान के फैसले की हाई कोर्ट में जानकारी दिए जाने के बाद भी अभी तक यह भुगतान नहीं किया गया है। दरअसल, हाईकोर्ट ने इस साल पांच फरवरी को गन्ना आयुक्त को अदालत में तलब किया था और निर्देश दिया कि वे ब्याज भुगतान के उसके आदेश का तत्काल पालन करें अथवा पांच अप्रैल को अवमानना मामले में अदालत की कड़ी कार्रवाई का सामना करने के लिए पेश हो जाए।

बकाया पर ब्याज की मांग को लेकर 25 साल से लड़ रहे हैं अदालती लड़ाई

वीएम सिंह ने बताया कि किसानों को बकाया भुगतान पर ब्याज के मामले पर पिछले 25 साल से अदालत में लड़ाई लड़ रहे हैं और आंदोलन भी चला रहे हैं। सबसे पहले अदालत में अर्जी अगौती चीनी मिल के किसानों की ओर से प्रस्तुत की गई थी। जिसमें वर्ष 1995-96 और 1996-97 के दौरान गन्ने के भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने एक मई 1997 को ब्याज समेत बकाये के भुगतान का आदेश दिया था। इसके बाद बकाये का तो भुगतान कर दिया गया लेकिन ब्याज नहीं दिया गया। इस पर अवमानना का केस डालने पर मिल मालिक को गिरफ्तार किया गया। 12 साल तक सुनवाई के बाद नवंबर 2009 में केस तब समाप्त हुआ जब मिल मालिक ने किसानों को 2 करोड़ 18 लाख रुपये का ब्याज का भुगतान कर दिया।

चालू पेराई सीजन का बकाया 9,200 करोड़ से ज्यादा 

पेराई बंद हुए लगभग महीना भर बीतने के बावजूद भी पहली अक्टूबर 2018 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2018-19 (अक्टूबर-सितंबर) का ही 12 जुलाई 2019 तक गन्ना किसानों का बकाया 9,216 करोड़ रुपये बचा हुआ है जबकि इसके पिछले पेराई सीजन 2017-18 का भी 46.23 करोड़ रुपये और पेराई सीजन 2016-17 का 22.29 करोड़ रुपये अभी भी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर बकाया है जबकि तय मानकों के अनुसार चीनी मिलों को गन्ना खरीदने के 14 दिन के अंदर किसानों को भुगतान करना होता है।