Home एग्रीकल्चर पालिसी आरईसीपी समझौते के खिलाफ देशभर में करीब 500 जगहों पर किसानों का विरोध
आरईसीपी समझौते के खिलाफ देशभर में करीब 500 जगहों पर किसानों का विरोध
आरईसीपी समझौते के खिलाफ देशभर में करीब 500 जगहों पर किसानों का विरोध

आरईसीपी समझौते के खिलाफ देशभर में करीब 500 जगहों पर किसानों का विरोध

रीजनल कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरईसीपी) समझौते में भारत के शामिल होने के खिलाफ देशभर के किसान संगठनों कड़ी आपत्ति की हैं। किसान संगठनों का कहना है कि इस संधि में डेयरी और कृषि को शामिल किया तो देश का किसान बबार्द हो जायेगा। इसके विरोधस्वरूप देशभर में करीब 500 जगहों पर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के बैनर तले करीब 250 किसान संगठन देश में अलग-अलग स्थानों पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थाईलैंड दौरे पर हैं जहां वह आज आरसीईपी समिट में सम्मिलित होंगे।

मध्य प्रदेश की राजधान भोपाल में आरसीईपी समझौते के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे एआईकेएससीसी के संयोजक वीएम सिंह ने आउलुक को बताया कि आरईसीपी समझौते में डेयरी और कृषि को शामिल किया गया तो फिर देश का किसान बबार्द हो जायेगा। उन्होंने बताया कि खेती-किसानी पहले की घाटे का सौदा साबित है। उन्होंने बताया कि एआईकेएससीसी के बैनर तले आज देशभर में करीब 500 जगहों पर इसका विरोध किया जा रहा है।

सरकार एक तरफ किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, दूसरी तरफ आरसीईपी समझौता

उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ तो किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, दूसरी तरफ आसीईपी समझौता कर रही है जिससे देश में शून्य शुल्क पर डोयरी उत्पादों का आयात होगा जबकि हमारे यहां पहले से ही दूध का उत्पादन खपत से ज्यादा होता है। पहले ही दूध किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में अगर आरसीईपी समझौता से डेयरी और कृषि का बाहर नहीं रखा गया तो फिर आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से दूध उत्पादों का भारी मात्रा में आयात होगा।

मुंबई में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता

मुंबई में आरसीईपी समझौते के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता एवं पूर्व लोकसभा सांसद राजू शेट्टी के अनुसार देश के छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका एकमात्र साधन, दूध उत्पादन है। अगर सरकार ने आरसीईपी समझौता किया तो फिर देश के दूध किसानों के सामने रोजी-रोटी का सवाल खड़ा हो जायेगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते का देशभर के करीब 250 से किसान संगठन विरोध कर रहे हैं तथा इसके खिलाफ आज देशभर में धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है।

डेयरी के साथ ही तिलहन, दलहन, बागवानी और रबर के किसान होंगे प्रभावित

एआईकेएससीसी के बैनर तेल दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरसीईपी समझौते के खिलाफ प्रदर्शन में हजारों किसान जुड़ेंगे। इसमें ऑल इंडिया किसान सभा के नेता और पूर्व सांसद हन्नान मौला के साथ ही स्वराज इंडिया के अध्यक्ष और किसान नेता योगेन्द्र यादव भी शामिल होंगेे। जय किसान आंदालेन के राष्ट्रीय संयोजक अविक शाह के अनुसार खेती घाटे का सौदा साबित होने के देश में किसानों की आत्महत्याएं रुक नहीं रही हैं, ऐसे में अगर सरकार ने आसीईपी समझौता से डेयरी और कृषि क्षेत्र को बाहर नहीं रखा तो फिर डेयरी उद्योग के साथ ही तिलहन, दलहन, बागवानी और रबर के साथ बर्बाद हो जायेंगे।