Home एग्रीकल्चर पालिसी मछली पालकों को सस्ता कर्ज देने की तैयारी, सरकार जल्द ला सकती है राष्ट्रीय मत्स्य नीति
मछली पालकों को सस्ता कर्ज देने की तैयारी, सरकार जल्द ला सकती है राष्ट्रीय मत्स्य नीति
मछली पालकों को सस्ता कर्ज देने की तैयारी, सरकार जल्द ला सकती है राष्ट्रीय मत्स्य नीति

मछली पालकों को सस्ता कर्ज देने की तैयारी, सरकार जल्द ला सकती है राष्ट्रीय मत्स्य नीति

केंद्र सरकार मछली पालन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इससे जुड़े लोगों को सस्ते कर्ज देने समेत अन्य रियायतें देने पर विचार कर रही हैं इसके लिए जल्द ही राष्ट्रीय मत्स्य नीति लाई जायेगी।

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, इसी कड़ी में मछली पालन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इससे जुड़े लोगों को सस्ती दर पर कर्ज देने की योजना है। नई राष्ट्रीय मत्स्य नीति में मछली पालन के साथ ही मार्किट उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। नई नीति के तहत मत्स्य पालन को एग्रीकल्चर क्षेत्र में प्राथमिकता की श्रेणी में रखा जायेगा, इसे जुड़े किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के अलावा बीमा कवर देने का भी का प्रस्ताव है।

नई नीति में निजी निवेश पर जोर रहेगा

नई नीति के मसौदे में समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इसके तहत ही केंद्र सरकार का तटीय क्षेत्र के विकास पर भी फोकस रहेगा। सूत्रों के नई नीति में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए निजी निवेश पर जोर रहेगा, तथा इसके लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल के तहत सरकार निजी कंपनियों को इस क्षेत्र में निवेश के लिए आकर्षित करेगी। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार नई नीति के माध्यम से पीपीपी माडल के तहत सप्लाई चेन, प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने के साथ ही समुद्री उत्पादों के रख-रखाव पर ज्यादा जोर देगी। नई नीति के मसौदे में मत्स्य प्रबंधन योजनाओं के साथ ही राष्ट्रीय मत्स्य विकास परिषद बनाने का प्रस्ताव भी है। दक्षिण भारत के साथ ही देश के अन्य कई राज्यों में मछली पालन की असीम संभावनाएं हैं।

डब्ल्यूटीओ की 12वीं बैठक में मत्स्य पालन उद्योग की सब्सिडी का मुद्दा उठेगा

उधर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की जून में कजाखस्तान में होने वाली 12वीं मंत्रिस्तरीय बैठक में मत्स्य पालन उद्योग को सब्सिडी का मुद्दा प्रमुखता से उठेगा। मछली पालन क्षेत्र को सब्सिडी का मुद्दा भारत के लिए काफी महत्व रखता है। मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 164 सदस्यीय डब्ल्यूटीओ का निर्णय लेने वाला शीर्ष निकाय है। सभी सदस्य देशों के वाणिज्य मंत्री इस सम्मेलन में विचार विमर्श में हिस्सा लेंगे।

विकसित देशों के मुकाबले भारत अपने मछुआरों को देता है बहुत कम सब्सिडी

12वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 8 से 11 जून तक कजाखस्तान के नूर-सुल्तान में आयोजित किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस बार मंत्रिस्तरीय बैठक में मछली पालन उद्योग सब्सिडी का मुद्दा प्रमुखता से उठेगा। हालांकि, इस बारे में बातचीत तेजी से आगे नहीं बढ़ रही है, लेकिन विकसित देश चाहते हैं कि मत्स्य सब्सिडी में उल्लेखनीय कटौती की जाए। भारत इन वार्ताओं में समान और संतुलित नतीजे चाहता है। भारत अपने छोटे और सीमान्त मछुआरों को मदद उपलब्ध कराता है। अमीर देश जहां अपने मछुआरों को अरबों डॉलर की सब्सिडी उपलब्ध कराते हैं, वहीं भारत मात्र 770 करोड़ रुपये की सब्सिडी देता है। सरकार ईंधन और मछली पकड़ने वाली बोट पर सब्सिडी प्रदान करती है। भारत की तुलना में विकसित देशों के मछुआरे अधिक यांत्रिक बोट का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा उनकी प्रसंस्करण इकाइयां भी हैं।

11वीं मंत्रिस्तरीय बैठक दिसंबर, 2017 में अर्जेंटीना में हुई थी

विकसित देश मछली पालन सब्सिडी पर वार्ताओं को तेज करना चाहते हैं ताकि कजाखस्तान बैठक में किसी समझौते पर पहुंचा जा सके। अधिकारी ने बताया कि विकासशील देश होने के नाते भारत अपने मछुआरों को न्यूनतम सब्सिडी उपलब्ध कराता है। डब्ल्यूटीओ की 11वीं मंत्रिस्तरीय बैठक दिसंबर, 2017 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में हुई थी। इस बैठक में सदस्य देशों के बीच मत्स्य सब्सिडी के मुद्दे पर रचनात्मक तरीके से बातचीत पर सहमति बनी थी।