Home एग्रीकल्चर पालिसी आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव की तैयारी, कृषि जिंसों में ढील दे सकती है सरकार
आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव की तैयारी, कृषि जिंसों में ढील दे सकती है सरकार
आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव की तैयारी, कृषि जिंसों में ढील दे सकती है सरकार

आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव की तैयारी, कृषि जिंसों में ढील दे सकती है सरकार

केंद्र सरकार आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव की तैयारी कर रही है कृषि जिंसों में ढील देने के लिए नया ड्राफ्ट तैयार किया गया है स पर सहमति बनाने के लिए उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने सितंबर को राज्यों के खाद्य मंत्रियों की बैठक बुलाई है। सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव का नया ड्राफ्ट तैयार कर लिया है नए प्रावधान लागू होने के बाद व्यापारियों के लिए किसानों से फसल की खरीदना आसान हो जागा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ड्राफ्ट नोट पर चर्चा के लिए सितंबर 2019 को संबंधित पक्षों की बैठक बुलाई है। आवश्यक वस्तु अधिनियम में राज्यों की भागीदारी ज्यादा है, इसलिए सभी राज्यों के खाद्य मंत्रियों को बैठक में बुलाया गया है।

अकाल एवं जंग के वक्त ही आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करने की सिफारिश

नए प्रावधानों के अनुसार कृषि जिसों में सिर्फ अकाल एवं जंग के वक्त ही आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू होगा इसके अलावा किसी आवश्यक कृषि जिंस की कीमत 50 फीसदी बढ़ने पर इसे लागू किया जा सकेगा। सजा के प्रावधानों में भी ढील देने की तैयारी है। अभी दोषी पाए जाने पर सात साल की सजा का प्रावधान है।अधिकारी ने बताया कि आश्यक वस्तु अधिनियम के कारण व्यापारी जरूरी वस्तुओं का स्टॉक नहीं कर पाते हैं ढील देने से व्यापारी ज्यादा मात्रा में स्टॉक कर सकेंगेजिसका फायदा किसानों को मिलने की उम्मीद है। आवश्यक वस्तु अधिनियम इस समय चीनीचावल, दलहन, बीज और खाद्य तेल पर लागू है।

मुख्यमंत्रियों की समिति ने भी इसे गैर-वाजिब माना है

किसानों की आय बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की अध्यक्षता में गठित मुख्यमंत्रियों की समिति ने भी आवश्यक वस्तु अधिनियम को गैरवाजिब करार दिया है। फड़नवीस ने कहा था कि इसे तत्काल हटाने की जरूरत है। मुख्यमंत्रियों की राय में गैर-कृषि उत्पादों पर भले यह कानून लागू होलेकिन कृषि जिंसों पर इसकी जरूरत नहीं है। समिति का मानना था कि जिंस बाजार अब वैश्विक हो चुका है। इसे ध्यान में रखकर नीतियां बनानी होंगी। मंडियों पर सीमित लोगों का एकाधिकार है तथा उपज के भाव मुट्ठीभर लोग मिलकर तय कर लेते हैं, जिससे किसानों को लाभ मिलना मुश्किल होता है।