Home एग्रीकल्चर पालिसी पीएम-किसान योजना में दो करोड़ किसानों को दी जा चुकी है पहली किस्त-कृषि मंत्री
पीएम-किसान योजना में दो करोड़ किसानों को दी जा चुकी है पहली किस्त-कृषि मंत्री
पीएम-किसान योजना में दो करोड़ किसानों को दी जा चुकी है पहली किस्त-कृषि मंत्री

पीएम-किसान योजना में दो करोड़ किसानों को दी जा चुकी है पहली किस्त-कृषि मंत्री

कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत दो करोड़ से अधिक किसानों को 2,000 रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है।

अंतरिम बजट 2019-20 में केंद्र सरकार ने पीएम-किसान योजना की घोषणा की थी जिसके तहत दो हेक्टेयर तक भूमि रखने वाले 12 करोड़ छोटे और सीमांत किसानों को 6,000 रुपये प्रति वर्ष तीन किस्तों में दिये जायेंगे। सरकार ने मार्च तक 2,000 रुपये की पहली किस्त देने का वादा किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी को उत्तर प्रदेश में इस योजना का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया। उन्होंने करीब एक करोड़ से अधिक किसानों के खाते में 2,000 रुपये की पहली किश्त सीधे बैंक खाते में जारी की थी।

पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों ने नहीं भेज रहे आंकड़े

कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि कई राज्य योजना को लागू करने और डेटा भेजने में गंभीरता दिखा रहे हैं। अब तक लगभग दो करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित हो चुके हैं। मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्य इस योजना को लागू करने के लिए उत्सुक नहीं हैं और इसलिए डेटा उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे राज्यों से मैं केवल इतना कहना चाहूंगा कि वह राजनीति को अलग रखें, अन्यथा मतदाता उन्हें सबक सिखा देंगे।

आईसीएआर में भर्ती पारदर्शी तरीके से

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में शीर्ष नेतृत्वकारी पदों पर बड़ी संख्या में रिक्तियों के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि भर्ती अब पारदर्शी तरीके से की जाएगी क्योंकि पहले पूरी प्रक्रिया को ‘मैनुअल’ के विपरीत डिजिटल कर दिया गया है। वेतन समानता के मुद्दे पर आईसीएआर के कर्मचारियों द्वारा विरोध प्रदर्शन करने के बारे में मंत्री ने कहा कि इस मामले को उनके कनिष्ठ मंत्री गौर कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार ने कृषि नीति को उत्पादन-केंद्रित से बदलकर अब आय-केंद्रित कर दिया है। किसानों को बात समझ आनी शुरू हो गई है और अब वे बड़े पैमाने पर आय बढ़ाने की खेती की ओर बढ़ रहे हैं।