Home एग्रीकल्चर पालिसी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के प्रीमियम में कोई बदलाव नहीं : अधिकारी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के प्रीमियम में कोई बदलाव नहीं : अधिकारी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के प्रीमियम में कोई बदलाव नहीं : अधिकारी

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के प्रीमियम में कोई बदलाव नहीं : अधिकारी

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत बीमित फसलों के लिए किसानों के प्रीमियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रावधानों में किए बदलावों से किसानों के प्रीमियम पर किसी तरह का फर्क नहीं पड़ेगा।

कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के सीईओ आशीष भूटानी के अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रावधानों में किए बदलावों से किसानों के प्रीमियम पर किसी तरह का फर्क नहीं पड़ेगा। यानी प्रीमियम की दरें नहीं बढ़ी हैं। किसान को पहले की ही तरह खरीफ की फसल पर 2 फीसदी, रबी की फसलों पर 1.5 फीसदी और बागवानी फसलों पर अधिकतम 5 फीसदी का प्रीमियम देना होगा।

किसान क्रेडिट कार्ड लेने वाले किसानों के लिए भी पीएमएफबीवाई स्वैच्छिक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 19 फरवरी 2020 को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में फसली बीमा योजनाओं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) और मौसम आधारित फसल बीमा योजना में कई बड़े बदलावों को मंजूरी मिली थी। जिसमें फसल बीमा को स्वैच्छिक किए जाने जैसा महत्वपूर्ण निर्णय भी शामिल था। इसके साथ ही पहले जो किसान केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के तहत लोन लेते थे उनसे बैंक में बिना बताए प्रीमियम काट लिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इसके साथ ही पीएमएफबीवाई के तहत केंद्रीय सब्सिडी को गैर सिंचित क्षेत्रों में 30 फीसदी और सिंचित क्षेत्रों में 25 फीसदी तक कर दिया है। इसके साथ नए फैसले के तहत 50 फीसदी सिंचित क्षेत्र सिंचित में ही गिना जाएगा।

न तो किसानों का प्रीमियम बदला गया है और न ही भविष्य में इसे बदला जाएगा

भूटानी ने स्पष्ट किया कि न तो किसानों का प्रीमियम बदला गया है और न ही भविष्य में इसे बदला जाएगा। किसानों को भुगतान के दावे में देरी की आलोचना पर, उन्होंने कहा कि यह मुख्य रूप से तीन कारणों पर निर्भर है। पहला या तो राज्य की सब्सिडी समय पर नहीं आई हो। उन्होंने कहा कि राज्य के भुगतान में विलंब इसका सबसे बड़ा कारण रहा है। दूसरा कारण यह है कि बीमा कंपनियों द्वारा क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट (सीसीई) डेटा देने में देरी हुई है। इसके अलावा तीसरा कारण यह भी हो सकता है कि राज्यों द्वारा एकत्र किए गए सीसीई डेटा पर कंपनियों को आपत्ति हो। उन्होंने इस बात का खंडन किया कि बीमा कंपनियां योजना से पैसा कमा रही हैं, उन्होंने कहा यह सही नहीं है।

एजेंसी इनपुट