Home एग्रीकल्चर पालिसी कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए 50 हजार टन प्याज का बफर स्टॉक बनायेगी सरकार
कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए 50 हजार टन प्याज का बफर स्टॉक बनायेगी सरकार
कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए 50 हजार टन प्याज का बफर स्टॉक बनायेगी सरकार

कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए 50 हजार टन प्याज का बफर स्टॉक बनायेगी सरकार

केंद्र सरकार ने प्याज उत्पादक राज्यों में सूखे जैसी स्थिति के मद्देनजर आने वाले महीनों में इस महत्वपूर्ण फसल की कीमत पर अंकुश रखने के लिए 50,000 टन प्याज का बफर स्टॉक बनाना शुरू कर दिया है।

खाद्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एशिया में प्याज की सबसे बड़ी थोक मंडी महाराष्ट्र के लासलगांव में इसका थोक भाव 29 फीसदी बढ़कर 11 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। पिछले साल इसी दौरान भाव 8.50 रुपये का था। दिल्ली में खुदरा प्याज 20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रही है। उत्पादक क्षेत्र में सूखे की स्थिति के कारण, रबी की प्याज का उत्पादन कम होने की संभावना है। इससे इसकी आपूर्ति व भाव, दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।

खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सहकारी संस्था नाफेड को मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत प्याज की खरीद करने के लिए कहा गया है, उसने अब तक रबी सीजन में लगभग 32,000 टन प्याज खरीदी है। उन्होंने बताया कि प्याज के अलावा सरकार इस वर्ष दलहन के लिए भी 16.15 लाख टन का बफर स्टॉक बना रही है। इस वर्ष महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश प्रदेश जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक राज्य सूखे की स्थिति से गुजर रहे हैं।

दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार उत्पादन ज्यादा

कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू फसल सीजन 2018-19 में प्याज का उत्पादन 232.8 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल प्याज का उत्पादन 232.6 लाख टन हुआ था। सरकार के द्वारा सूखे के प्रभाव के कारण अनुमान को संशोधित किये जाने की उम्मीद है। भारत में प्याज का उत्पादन रबी और खरीफ दोनों सीजनों में होता है, तथा कुल उत्पादन का 60 फीसदी हिस्सा रबी सीजन में होता है।

पिछले साल किसानों को औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ी थी फसल

इस साल महाराष्ट्र में पानी की कमी के चलते प्याज की फसल प्रभावित होने की आशंका है। इसी के मद्देनज़र सरकार ने प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी होने से पहले 50,000 टन प्याज का भंडारण करना शुरू कर दिया है। पिछले वर्ष प्याज के अधिक उत्पादन के चलते किसानों को इसे महज 50 पैसे और एक रुपये प्रति किलो की सस्ती कीमत पर बेचना पड़ा था।

महाराष्ट्र का 60 फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में

इस वर्ष महाराष्ट्र में पानी की कमी के कारण सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। जिसके कारण यहां के इलाकों में प्याज़ के उत्पादन में कमी की आशंका है। उत्पादन में कमी के कारण, अप्रैल से नवम्बर के दौरान होने वाली प्याज़ की मांग बढ़ने से कीमतों में बढ़ोत्तरी भी हो सकती है। महाराष्ट्र का 60 फीसदी हिस्सा पानी की भयानक कमी से जूझ रहा है।

एजेंसी इनपुट