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संसद के इतिहास में पहली बार किसानों के प्राइवेट बिल होंगे पेश, 21 प्रमुख राजनीतिक दलों का ​समर्थन

JUL 17 , 2018

देश में खाद्यान्न के अन्न भंडार भरने वाला किसान अब आर-पार की लड़ाई लड़ना चाहता है। इसलिए 20 जुलाई को किसानों की पूर्ण कर्जमाफी व फसलों के लिए सुनिश्चित लाभाकरी मूल्य अधिकार बिल 2018 को पारित कराने हेतु संसद में पेश करने की योजना है। किसानों के इन दोनों प्राइवेट बिलों को देश के 21 प्रमुख राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है।

सत्तर सालों से देश का किसान राजनैतिक दलों का मोहरा बनता रहा है तथा रानीतिक दलों ने चुनाव के समय ही किसानों की चिंता, वह भ्‍ाी  केवल अपने घोषणापत्रों में ही की, लेकिन अब किसान अपनी लड़ाई खुद लड़ेगा, वह भी कानूनी हक के साथ। इसीलिए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के बैनर तले देशभर के 200 किसान संगठनों ने मिलकर दो प्राइवेट बिल तैयार किए हैं।

एआईकेएससीसी के संयोजक वी एम सिंह ने आउटलुक को बताया कि देशभर के 200 किसान संगठनों ने मिलकर यह दोनो बिल तैयार किए हैं, इनमें किसानों का दर्द छिपा हुआ है। उन्होंने बताया कि अभी तक किसान सड़क रोक कर या फिर रेल रोक कर प्रदर्शन करता रहा है लेकिन पहली बार अपने कानूनी अधिकार के लिए लड़ेगा। हमारे साथी लोकसभा के सदस्य राजू शेट्टी 20 जुलाई को किसानों के इन दोनों बिलों को संसद में पेश करेंगे, उसके बाद इन बिलों को राज्यसभा में पेश किया जायेगा।

उन्होंने बताया कि किसानों के इन दोनों प्राइवेट बिलों को देश के प्रमुख 21 राजनैतिक दलों का समर्थन प्राप्त है, इनमें से कुछ दल तो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्‍व वाले एनडीए में भी शामिल हैं।

किसानों के इन दोनों प्राइवेट बिलों का समर्थन करने के लिए एआईकेएससीसी ने सभी लोकसभा सांसदों को पत्र लिखा है।

मोदी सरकार हाल ही में घोषित खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लागत का डेढ़ गुना बताकर किसानों को गुमराह कर रही है, यह किसानों के साथ धोखा है, इसके विरोध में 20 जुलाई को देश भर के हजारों किसान काले झंडे लेकर दिल्ली में मंडी हाउस से संसद भवन तक मार्च निकालेंगे, तथा धरना देंगे।


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