Home एग्रीकल्चर पालिसी किसानों का, कर्ज न चुका पाना दीवानी मामला, बैंक बना देते आपराधिक केस -विशेषज्ञ
किसानों का, कर्ज न चुका पाना दीवानी मामला, बैंक बना देते आपराधिक केस -विशेषज्ञ
किसानों का, कर्ज न चुका पाना दीवानी मामला, बैंक बना देते आपराधिक केस -विशेषज्ञ

किसानों का, कर्ज न चुका पाना दीवानी मामला, बैंक बना देते आपराधिक केस -विशेषज्ञ

कांग्रेस ने अपना घोषणा पत्र में कहा है कि किसानों का कर्ज न चुका पाना अपराध के दायरे से बाहर होगा। ऐसे किसान जो कर्ज को चुकाने में असमर्थ हैं, उन पर आपराधिक मुकदमे नहीं चलेंगे बल्कि दीवानी कानून के तहत कानूनी कार्रवाई होगी। जानकारों और विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस के इस वादा से किसानों को राहत मिलेगी। उन्हें कर्ज न चुकाने की स्थिति में आपराधिक मामले चलाए जाने और गिरफ्तारी कोई आशंका नहीं होगी। जानकारों के अनुसार ऐसे मामले आपराधिक केस हैं ही नहीं, आपराधिक मामले के तौर पर कार्रवाई करके किसानों को बेवजह परेशान किया जाता है।

पूर्व कृषि सचिव सिराज हुसैन ने कहा कि कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कहा है कि कर्ज नहीं चुकाने पर किसानों पर आपराधिक मामला चलाकर गिरफ्तार नहीं किया जायेगा। हालांकि जब से मीडिया की पहुंच आम जनता तक बढ़ी है तब से किसानों की गिरफ्तारी इन मामलों में नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि जब बड़े-बड़े उद्योगपति बैंकों की मोटी रकम लेकर विदेश भाग जाते हैं, तो उसके मुकाबले तो किसानों का कर्ज कुछ भी नहीं है।

कर्ज वसूली न होने पर बैंक राज्य सरकार से लेते हैं मदद

दरअसल प्राथमिकता में बांटे जाने वाले कृषि समेत सभी तरह कर्जों की वसूली न होने पर बैंक इनकी वसूली के लिए राज्य सरकार की मदद लेते हैं। सरकार भी प्राथमिकता क्षेत्र में लोन बांटने के लिए बैंकों को प्रोत्साहित करने के लिए कर्ज वसूली की जिम्मेदारी खुद पर लेती हैं। इसके तहत जिलाधिकारी राजस्व वसूली की तरह किसानों से बैंकों के कर्जों की वसूली करते हैं। वसूली न होने पर राजस्व वसूली के नियमों के तहत आपराधिक कार्रवाई करते हैं। कांग्रेस ने इसी नियम में बदलाव का वादा किया है।

कांग्रेस के घोषणपत्र से संपूर्ण कर्जमाफी और डेढ़ गुना एमएसपी नदारद

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआइकेएससीसी) के संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि किसानों का कर्ज नहीं चुका पाना, आपराधिक मामला नहीं बनता है, यह तो दीवानी मामला है। उन्होंने बताया कि इसे तो बैंकों ने आपराधिक मामला बना दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने नवंबर 2018 में दिल्ली में एआइकेएससीसी के मंच से घोषणा की थी, कि किसानों को संपूर्ण कर्जमाफी और फसलों की लागत का डेढ़ गुना दाम, स्वामीनाथन की रिपोर्ट के आधार पर दिया जायेगा। लेकिन यह दोनों ही बातें कांग्रेस ने अपने घोषणपत्र में शामिल नहीं की हैं, इससे कांग्रेस की नीयत पर सवाल उठते हैं।

बैंक किसानों से हस्ताक्षरयुक्त चेक ले लेते हैं

हरियाणा में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि हम कांग्रेस की इस पहल का स्वागत करते है। हालांकि उन्होंने भी कहा कि किसानों द्वारा कर्ज नहीं चुका पाना आपराधिक मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि बैंक अपनी सुविधा के लिए किसानों को जिस समय कर्ज देते हैं, तो उनसे हस्ताक्षरयुक्त चेक ले लेते हैं, और जब किसान उस कर्ज को चुका नहीं पाता है तो बैंक किसान के उस चेक को लगा देते हैं, जबकि बैंक में किसान के खाते में बकाया रकम नहीं होती। इसलिए चेक बाउंस हो जाता है। उन्होंने कहा कि राज्य में इस तरह से हजारों मामले चल रहे हैं।