Home एग्रीकल्चर पालिसी आरसीईपी समझौते से पीछे हटी सरकार, किसानों की हुई जीत
आरसीईपी समझौते से पीछे हटी सरकार, किसानों की हुई जीत
आरसीईपी समझौते से पीछे हटी सरकार, किसानों की हुई जीत

आरसीईपी समझौते से पीछे हटी सरकार, किसानों की हुई जीत

रीजनल कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरईसीपी) समझौते के खिलाफ देशभर के किसान संगठनों के दबाव से सरकार ने पीछे हट गई है। सूत्रों के अनुसार किसानों की एकता और संघर्ष के दबाव में प्रधानमंत्री ने अस्थाई रूप से इस समझौते को अस्वीकार कर दिया है। यह देश के किसानों की जीत है।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के बैनर तले करीब आज देश के 250 किसान संगठनों ने देश में अलग-अलग करीब 500 स्थानों पर धरना-प्रदर्शन किया तथा आरसीईपी का पुतला फूंका। मध्य प्रदेश की राजधान भोपाल में आरसीईपी समझौते के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे एआईकेएससीसी के संयोजक वीएम सिंह ने आउलुक को बताया कि सरकार किसानों की एकता और संघर्ष से दबाव में आ गई है, सरकार ने अस्थाई रुप से इस समझौते को अस्वीकार कर दिया है जोकि देश के किसानों की जीत है।

वीएम सिंह कहा कि यह किसानों की जीत है, हम अपने आपकों बचाने में कामयाब हए है। आज सुबह किसानों ने देशभर में 500 जगहों पर प्रदर्शन किया उसका दबाव है क्योंकि अगर प्रधानमंत्री इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहते थे, तो वहां गए ही क्यों? अगर यह खबर सही है तो हम प्रधानमंत्री को धन्यवाद करना चाहेंगे साथ ही हम उन सभी किसान संगठनों का भी जोकि इसके खिलाफ खड़े हुए उनका भी धन्यवाद करना चाहेंगे। विदेशों में किसानों को वहां की सरकारें सब्सिडी देती है, जबकि हमारे यहां केंद्र सरकार 6,000 रुपये सालाना दे तो रही है, लेकिन वह भी सभी किसानों को नहीं मिलता है। इसलिए हमारे यहां के किसानों की तुलना विदेशी किसानों से नहीं करनी चाहिए।

इससे डेयरी उद्योग से जुड़े लगभग 10 करोड़ किसान होंगे प्रभावित

हालांकि उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि भारतीय वार्ताकारों द्वारा इस समझौते को रोकने के लिए कथित तौर पर उठाए गए मुद्दे वो नहीं हैं जो किसानों सहित प्राथमिक उत्पादकों के हितों की रक्षा कर सकते हैं। भारत सरकार अपने निर्यात के लिए अधिक अवसर और टैरिफ बेस ईयर को 2019 करने के लिए बहस कर रही है पर उसने दूध, कृषि उत्पादों और निर्मित वस्तुओं के आयात को रोकने का मुद्दा भी नहीं उठाया है जो भारतीय किसानों और उद्योग को बर्बाद कर देगा। यह भारतीय किसानों व लघु उत्पादकों की कीमत पर कॉर्पोरेट का पक्ष ले रहा है। आरसीईपी समझौते से केवल डेयरी उद्योग से जुड़े लगभग 10 करोड़ किसान प्रभावित होंगे।

मसौदे का प्रारुप सार्वजनिक करने की मांग

एआईकेएससीसी ने कहा कि इस तरह का व्यापार समझौता अस्वीकार्य है, जिससे करोड़ों भारतीयों की आजीविका पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। एआईकेएससीसी ने सरकार द्वारा किसान निकायों के साथ-साथ संसद और सभी विधान सभाओं में बातचीत और चर्चा के तहत सभी 25 बिंदुओं को पूर्ण रूप से जारी करने की मांग की है। देश के लोगों से सौदे का विवरण छिपाना लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाना है। इससे ये पता लगता है की इस सौदे में छिपाने के लिए कुछ है और आरसीईपी जनविरोधी है। उपलब्ध इनपुट के आधार पर, ऐसा लगता है कि सरकार भारतीय किसानों, छोटे व्यापारियों और श्रमिकों के विशाल संख्या की कीमत पर कुछ चुनिंदा क्षेत्रों और पसंदीदा कॉर्पोरेट्स के लिए कुछ रियायतों के पक्ष में व्यापार करने की तैयारी कर रही है। इस धारणा को दूर करने और मसौदे की प्रकृति पर सफाई देने की जीम्मेदारी अब सरकार पर है। एआईकेएससीसी इसलिए मांग करती है कि अब सरकार को समझौते का प्रारुप सार्वजनिक करना चाहिए और किसानों, खेत संगठनों, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श करने के साथ-साथ अंतिम निर्णय लेने से पहले संसद में पूरी चर्चा करनी चाहिए।

किसानों के हितों के लिए भारत को आरसीईपी समझौते से दूर रहना चाहिए

किसानों की आशंकाओं को दोहराते हुए एआईकेएससीसी ने कहा कि भारत को मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर करने से दूर रहना चाहिए और कृषि को ऐसे किसी भी समझौते से दूर रखना चाहिए। ईयू-यूएस एफटीए कृषि में शामिल नहीं है। भारत इस समय संयुक्त राज्य अमेरिका के दबाव में है। आरसीईपी समझौते से भारतीय बाजारों को दूध, दूध उत्पादों, कपास, गेहूं, मसालों, नारियल, रबर के सस्ते आयात का खतरा है।