Home एग्रीकल्चर पालिसी मिलिंग कोपरा के समर्थन मूल्य में 439 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
मिलिंग कोपरा के समर्थन मूल्य में 439 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
मिलिंग कोपरा के समर्थन मूल्य में 439 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी

मिलिंग कोपरा के समर्थन मूल्य में 439 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी

केंद्र सरकार ने मिलिंग कोपरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वर्ष 2020 के सत्र के लिए 439 रुपये और बाल कोपरा के एमएसपी में 380 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस आश्य का फैसला लिया गया।

बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि केंद्र सरकार ने फसल सीजन 2020 के लिए मिलिंग क्ववालिटी के मिलिंग कोपरा के समर्थन मूल्य में 439 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर फसल सीजन 2020 के लिए समर्थन मूल्य 9,960 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि पिछले साल इसका समर्थन मूल्य 9,521 रुपये प्रति क्विंटल था। इसी तरह से बाल कोपरा के समर्थन मूल्य में फसल सीजन 2020 के लिए 380 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर समर्थन मूल्य 10,300 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

30 लाख किसान को मिलेगा लाभ

कोपरा का उत्पादन मुख्यत: दक्षिण भारत के राज्यों में होता है, प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इससे 30 लाख किसान लाभान्वित होंगे। भारतीय राष्‍ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नैफेड) तथा भारतीय राष्‍ट्रीय सहकारी उपभोक्‍ता संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) नारियल उत्‍पादक राज्‍यों में किसानों से समर्थन मूल्‍य पर कोपरा की खरीद करती हैं। भारत विश्व में कोपरा उत्पादन और उत्पादकता में नंबर एक है।

नारियल की खेती 20 लाख हेक्टेयर से ज्यादा में होती है

सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि पिछले साल तमिलनाडु में कोपरा की कीमतों में कमी आई थी, तो केंद्र सरकार द्वारा किसानों से एमएसपी के माध्यम से खरीद की गई थी, जिससे कोपरा के किसानों को लाभ हुआ था। कोपरा के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर की गई है। देश में नारियल की खेती का क्षेत्रफल 20 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। सीएसीपी उत्पादन की लागत, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल कीमतों के रुख, कोपरा और नारियल तेल की कुल मांग और आपूर्ति, कोपरा के प्रसंस्करण की लागत और उपभोक्ताओं पर एमएसपी में वृद्धि के प्रभाव के आधार पर समर्थन मूल्य बढ़ाने की सिफारिश करता है।