Home एग्रीकल्चर पालिसी कैबिनेट ने अधिकांश पोषक तत्व आधारित उर्वरकों की सब्सिडी को स्थिर रखा
कैबिनेट ने अधिकांश पोषक तत्व आधारित उर्वरकों की सब्सिडी को स्थिर रखा
कैबिनेट ने अधिकांश पोषक तत्व आधारित उर्वरकों की सब्सिडी को स्थिर रखा

कैबिनेट ने अधिकांश पोषक तत्व आधारित उर्वरकों की सब्सिडी को स्थिर रखा

केंद्र सरकार ने किसानों को अधिकांश पोषक तत्व आधारित उर्वरकों की सब्सिडी को स्थिर रखा है। एक-दो में बढ़ोतरी की है जिससे वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान फॉस्‍फोरस, पोटाश, सल्‍फर और नाइट्रोजन वाले इन उर्वरकों पर सब्सिडी की अनुमानित लागत 22,875.50 करोड़ रुपये आने का अनुमान है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों समिति (सीसीईए) ने बुधवार को वर्ष 2019-20 के लिए फॉस्फेटिक और पोटैसिक (पीएंडके) उर्वरकों के लिए पोषक तत्वों पर आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरों के निर्धारण के लिए उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि देश में यूरिया की अधिक खपत होती है, लेकिन खेती के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर खाद का उपयोग भी महत्वपूर्ण हैं। सरकार इसके लिए सब्सिडी भी देती है।

उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सल्फर पर प्रति किलो 2.77 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है जिसे अब बढ़ाकर 3.56 रुपये प्रतिकिलो कर दिया गया है। नाइट्रोजन पर 18.90, फास्फोरस पर 15.11 और पोटाश पर 11.12 रुपये प्रति किलो को मंजूरी दी गई है। सीसीईए ने 2019-20 के लिये फॉस्फेट तथा पोटाश वाले उर्वरकों की पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरों को मंजूरी दी। इस पर 2019-20 के दौरान 22,875.50 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। जावड़ेकर ने कहा कि इससे उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

अप्रैल 2010 में हुई थी शुरूआत

पोषण आधारित सब्सिडी कार्यक्रम की शुरुआत केंद्र सरकार ने एक अप्रैल 2010 में गई थी, अधिसूचना जारी होने से पहले सब्सिडी की दर वर्ष 2018-19 के समान ही रहेगी।