Home एग्रीकल्चर पालिसी बजट पूर्व चर्चाः किसानों की आय बढ़ाने के लिए फूड प्रोसेसिंग को प्रोत्साहन दिया जाए
बजट पूर्व चर्चाः किसानों की आय बढ़ाने के लिए फूड प्रोसेसिंग को प्रोत्साहन दिया जाए
बजट पूर्व चर्चाः किसानों की आय बढ़ाने के लिए फूड प्रोसेसिंग को प्रोत्साहन दिया जाए

बजट पूर्व चर्चाः किसानों की आय बढ़ाने के लिए फूड प्रोसेसिंग को प्रोत्साहन दिया जाए

कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञ और किसान संगठनों ने सुझाव दिया है कि सरकार को मौजूदा वित्त वर्ष 2019-20 के बजट में फूड प्रोसेसिंग और कृषि उपज के निर्यात को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस करना चाहिए। उन्होंने कुछ कर संबंधी समस्याएं दूर करने का भी सुझाव दिया है।

सिर्फ उत्पादन बढ़ने से नहीं सुधरेगी किसानों की आमदनी

नई सरकार के गठन के साथ ही बजट के लिए चर्चाओं को दौर शुरू हो गया है। सरकार चालू वित्त वर्ष का पूर्ण बजट प्रस्तुत करेगी। इससे पहले वह विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से चर्चा कर रही है। कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि सिर्फ कृषि उत्पादन बढ़ाने से किसानों को बेहतर मूल्य मिलना सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए फूड प्रोसेसिंग के अलावा सहायक गतिविधियों जैसे पशुपालन, मत्स्य पालन और पोल्ट्री को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इन क्षेत्रों में सार्वजनिक और निजी निवेश बढ़ाने की अत्यधिक आवश्यकता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पूर्व सलाहकार समिति की बैठक में कृषि विशेषज्ञों ने कृषि उपजों और डेयरी उत्पादों पर जीएसटी घटाकर पांच फीसदी करने के अलावा कृषि सहकारी समितियों को कर मुक्त रखने की सिफारिश की है। सीतारमण पांच जुलाई को आम बजट पेश करेंगे।

बजट पूर्व बैठक में कृषि विशेषज्ञों और किसानों ने दिए सुझाव

बजट पूर्व बैठक में वित्त और कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों ने करीब ढाई घंटे तक चर्चा की। बैठक के बाद नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने संवाददाताओं को बताया कि बैठक में कई विशेषज्ञों ने फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। इस क्षेत्र में पिछले दो साल से ही तेजी दिखाई दी है। उससे पहले विकास दर नकारात्मक थी। बैठक में कहा गया कि फूड प्रोसेसिंग को प्रोत्साहन दिए बगैर कृषि क्षेत्र के विकास को अगले पायदान पर नहीं ले जा सकती है। फूड प्रोसेसिंग के विकास से न सिर्फ मांग सुधरेगी बल्कि किसानों की भी आमदनी बढ़ेगी। नीति आयोग के सदस्य के अनुसार बैठक में कृषि निर्यात बढ़ाने, गैर कृषि मुद्दों पर गौर करने, कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी निवेश बढ़ाने के रास्ते खोलने और क्षेत्रीय विकास पर भी चर्चा की गई।

केंद्रीय योजनाओं में केंद्र 90 फीसदी पैसा दे

किसान संगठन भारत कृषक समाज के प्रमुख अजय वीर जाखड़ ने कहा कि खेती में दीर्घकालिक निवेश पर जोर दिए जाने की जरूरत है। केंद्रीय योजनाओं में केंद्र सरकार को 90 फीसदी और राज्यों को 10 फीसदी हिस्सेदारी करनी चाहिए। इस समय योजनाओं में केंद्र और राज्यों की ओर से 60ः40 फीसदी के अनुपात में पैसा खर्च करने की व्यवस्था है। उन्होंने दुग्ध उत्पादों पर पांच फीसदी जीएसटी करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि वित्त मंत्री ने उनके सुझावों को गौर से सुना।

सरकारी समितियों को मजबूत बनाने का सुझाव

नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (एनसीयूआइ) के चीफ एक्जीक्यूटिव सत्यनरायण ने मांग उठाई कि वित्तीय रूप से व्यवहार्य सक्षम प्राइमरी एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव्स यानी सहकारी समितियों को मजबूत बनाना चाहिए और किसानों को उनकी उपज बेचने में मदद करनी चाहिए। देश में कुल 98 हजार सहकारी समितियां है जिनमें से 63 हजार सरकारी मानकों के अनुसार व्यवहार्य हैं और इनमें से एक तिहाई वित्तीय दृष्टि से मजबूत है और काम कर रही हैं।