Home एग्रीकल्चर पालिसी भाजपा के अलावा सभी दल केन्द्र से कृषि अध्यादेश वापस लेने को कहेंगे - पंजाब सरकार
भाजपा के अलावा सभी दल केन्द्र से कृषि अध्यादेश वापस लेने को कहेंगे - पंजाब सरकार
भाजपा के अलावा सभी दल केन्द्र से कृषि अध्यादेश वापस लेने को कहेंगे - पंजाब सरकार

भाजपा के अलावा सभी दल केन्द्र से कृषि अध्यादेश वापस लेने को कहेंगे - पंजाब सरकार

पंजाब सरकार द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि भाजपा के अलावा राज्य की सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियों में बुधवार को सहमति बनी है कि वे जनहित में केन्द्र से कृषि क्षेत्र से जुड़ा अध्यादेश वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली के साथ छेड़छाड़ नहीं करने का अनुरोध करेंगे।

यह बैठक पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बुलाई थी, ताकि हाल ही में पारित तीन अध्यादेशों कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) अध्यादेश, किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य बीमा समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश को लेकर सहमति बनायी जा सके।

अध्यादेशों की आलोचना करने से पहले उन पर कानूनी सलाह लेंगे - सुखबीर बादल

विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि जहां भाजपा ने प्रस्ताव का पूरी तरह से विरोध किया, वहीं उसके सहयोगी दल शिअद ने भी शुरुआत में कुछ आपत्तियां दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में वह आंशिक रूप से उस पर तैयार हो गया। उसमें कहा गया है कि शिअद ‘‘न्यूनतम समर्थन मूल्य पर निश्चित खरीदी’ और राज्य एपीएमसी के साथ कोई छेड़छाड़ ना की जाए इस पर अन्य दलों के साथ है। शिअद ने यह भी कहा कि इन मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री से मिलने जा रहे सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के मामले में भी वह अन्य दलों के साथ है। वहीं, शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पार्टी अध्यादेशों की आलोचना करने से पहले उन पर कानूनी सलाह लेगी। साथ ही, शिअद के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने राज्य सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति को गलत और पूरी तरह से भ्रामक बताया। चीमा ने कहा कि भाजपा और शिअद साथ-साथ हैं और उनके विचार भी समान हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी दलों से किसानों के मुद्दे पर सरकार का साथ देने का आग्रह किया

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का कहना है कि केन्द्र को कृषि मामले में हस्तक्षेप करने को कोई अधिकार नहीं है। सिंह ने कहा कि केंद्र को कृषि के मामले में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने सभी दलों से किसानों के हित में इस मुद्दे पर अपनी सरकार के साथ खड़े होने का आग्रह किया। अध्यादेशों को 'खतरनाक' करार देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शांता कुमार समिति की रिपोर्ट में एमएसपी की धीरे-धीरे वापसी और एफसीआई को खत्म करने की सिफारिश की गई थी। अध्यादेश, जो समिति की रिपोर्ट की तर्ज पर है, भी उसी दिशा में कदम हैं, उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इससे पंजाब के लिए एक अभूतपूर्व संकट पैदा होगा, जो कृषि पर निर्भर है।