Home एग्रीकल्चर न्यूज उजमा बैठक और किसान चैंबर्स आफ कॉमर्स ने पारित किए 15 प्रस्ताव, सभी प्रकार की फसलों पर एमएसपी की मांग
उजमा बैठक और किसान चैंबर्स आफ कॉमर्स ने पारित किए 15 प्रस्ताव, सभी प्रकार की फसलों पर एमएसपी की मांग
उजमा बैठक और किसान चैंबर्स आफ कॉमर्स ने पारित किए 15 प्रस्ताव, सभी प्रकार की फसलों पर एमएसपी की मांग

उजमा बैठक और किसान चैंबर्स आफ कॉमर्स ने पारित किए 15 प्रस्ताव, सभी प्रकार की फसलों पर एमएसपी की मांग

भारत सरकार द्वारा लाये गए तीन नए कृषि अध्यादेशों के अवलोकन के लिए उजमा बैठक ने किसान चैंबर ऑफ कॉमर्स के सहयोग से ऑनलाइन कांफ्रेंस की। इस दौरान देश-विदेश के कृषि एक्सपर्ट्स, अर्थशास्त्री, साइंटिफिक और कानून एक्सपर्ट्स, कृषि समाज के कार्यकर्ता और खाप प्रतिनिधियों ने 15 प्रस्ताव पास किए।

प्रस्ताव में कहा गया कि मंडी हो या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, फसल का एम.एस.पी. हर सूरत में सुनिश्चित रखा जाए। किसी भी उपज की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होनी चाहिएं चाहे खरीद मंडी परिसर में हो या किसी अन्य स्थान पर। सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का प्रावधान हो। न्यूनतम समर्थन मूल्य कानून लागू हो। साथ ही कहा गया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे खरीद अपराध घोषित हो। फसलों का डेढ़ गुना मूल्य स्वामीनाथन फॉर्मूला के अनुसार घोषित हो जिसके अन्तर्गत C2 फैक्टर की सही तरीके से गणना की जाए।

वहीं मांग की गई कि आपातकालीन स्थिती में निर्यात स्टॉक भी देश की जनता के लिए देश हित में उपलब्ध हो। प्रस्ताव में आगे कहा गया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत काला बाजारी रोकने के उद्देश्य से स्टॉक लिमिट लागू की जाए। जैसे कि पेरिशेबल वस्तुओं के स्टॉक की अनुमति 100% प्राइस बढ़ोतरी तक नहीं अपितु 50% तक रखी जाए व् ऐसे ही नॉन-पेरिशेबल की 50% की बजाए 25% रखी जाए| उजमा बैठक के प्रस्ताव में कहा गया कि  किसी भी खरीद संबंधी वाद-विवाद से बचने के लिए - त्रिपक्षीय समझौता होना चाहिए जिसमें किसान, सरकार/ सरकार का प्रतिनिधि और खरीदने वाला पक्ष शामिल हो।
इसके अलावा किसान उत्पादक संगठन योजना की समीक्षा करने की बात कही गई।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता भारत सरकार के पूर्व कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री ने की। इस दौरान देश-विदेश के करीब 30 वक्ताओं ने अध्यादेशों के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। जिनमें सरदार रमनदीप सिंह मान और सुरेश देशवाल, सर्वखाप प्रतिनिधि चौधरी रामकरण सौलंकी और चौधरी बलजीत सिंह मलिक, कृषि साइंटिस्ट डॉक्टर भीम सिंह दहिया, डॉक्टर जगदीश चंद्र डागर, इंजीनियर एस. एस. संधू, वरिष्ठ पत्रकार वीरेश तरार और हरवीर सिंह पंवार प्रमुख थे।