Home एग्रीकल्चर न्यूज उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर बकाया बढ़कर आठ हजार करोड़ के करीब
उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर बकाया बढ़कर आठ हजार करोड़ के करीब
उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर बकाया बढ़कर आठ हजार करोड़ के करीब

उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर बकाया बढ़कर आठ हजार करोड़ के करीब

वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गन्ना किसानों को 14 दिन के अंदर भुगतान का वायदा किया था, उसके बाद दो साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में इस वादे को दोहराया भी गया लेकिन चालू पेराई सीजन 2018-19 (अक्टूबर-सितंबर) का बकाया और बढ़ गया है, जबकि पिछले पेराई सीजन का भी पूरा भुगतान अभी नहीं हो पाया है, ‌जिससे राज्य के किसानों में सरकार के खिलाफ रोष बढ़ रहा है। राज्य की चीनी मिलों पर किसानों का बकाया बढ़कर अब करीब 8,000 करोड़ रुपये पहुंच गया है। 
 
राज्य के गन्ना किसानों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। किसानों का चालू पेराई सीजन में बकाया बढ़कर 6,998.06 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है जबकि पिछले पेराई सीजन का भी राज्य की चीनी मिलों पर अभी 943.74 करोड़ रुपये बकाया है। ऐसे में कुल बकाया की राशि बढ़कर 7,914.8 करोड़ रुपये हो गई है। 
 
बकाया है, लेकिन भुगतान भी हुआ है
राज्य के अतिरिक्त केन आयुक्त वीके शुक्ला ने बताया कि यह सही है कि चालू सीजन में किसानों का बकाया 6,000 करोड़ रुपये हो गया है लेकिन इस दौरान मिलों ने करीब 7,200 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया है। पेराई सीजन 2012-13, 2013-14 और 2014-15 के ब्याज के बकाया भुगतान के बारे में उन्होंने कहा कि तत्कालीन अखिलेश सरकार ने इसे माफ कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद इसका फिर से आकलन किया जा रहा है तथा कुल राशि कितनी है, इसका पता सोसायटियों से फाइनल आंकड़े आने के बाद ही चलेगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने हाल ही में 60,040 किसानों का गन्ने का 81 करोड़ रुपया जोकि किसी कारणवश उनके खाते में जमा नहीं हो पाया था, उसका भुगतान किया है। 
 
तय समय के अनुसार 14 दिन में होना चाहिए भुगतान
पहली अक्टूबर 2018 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन में उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों ने 8 फरवरी 2019 तक राज्य के किसानों से 17,010 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा है, जिसमें से भुगतान केवल 7,235 करोड़ रुपये का ही किया है। अत: गन्ना खरीद के 14 दिन के अंदर बकाया भुगतान के ‌नियम के  हिसाब से देखें, तो राज्य की चीनी मिलों पर बकाया बढ़कर 6,998.06 करोड़ रुपये हो गया है।
 
भुगतान नहीं होने से गन्ना किसान मुश्किल में 
अमरोहा जिले के देहरा चक गांव के गन्ना किसान जोगिंद्र आर्य ने बताया कि पिछले साल का भी पूरा भुगतान अभी तक नहीं मिल पाया है, जबकि चालू पेराई सीजन का बकाया भी लगातार बढ़ रहा है। चीनी मिलों द्वारा पेराई भी धीमी गति से की जा रही है, जिस कारण किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। आगे जैस ही गर्मी शुरू होगी, गन्ने में वजन कम होना शुरू हो जायेगा। उन्होंने बताया कि बकाया भुगतान नहीं होने से गन्ना किसानों को भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
 
बकाया में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी प्राइवेट चीनी मिलों की
यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन (यूपीएसएमए) के अनुसार चालू पेराई सीजन में सबसे ज्यादा बकाया राज्य की 92 प्राइवेट चीनी मिलों पर 6,373.55 करोड़ रुपये तथा 24 को-आपरेटिव मिलों पर 584.64 करोड़ रुपये है। इसके अलावा राज्य की एक मात्र पेराई कर रही कारपोरेशन मिल पर 39.87 करोड़ रुपये बकाया है। पिछले पेराई सीजन का बकाया प्रावइेट चीनी मिलों पर 943.34 करोड़ रुपये बचा हुआ है। 
 
चीनी उत्पादन पिछले साल से थोड़ा कम
राज्य के गन्ना आयुक्त कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पहली अक्टूबर 2018 से 8 जनवरी 2019 तक राज्य में चीनी का उत्पादन 59.11 लाख टन का हुआ है जोकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि के 60 लाख टन से थोड़ा कम है। चालू पेराई सीजन में राज्य में अभी तक गन्ने में औसतन रिकवरी की दर 11.11 फीसदी की आ रही है जबकि पिछले पेराई सीजन में रिकवरी की दर 10.31 फीसदी की थी। उन्होंने बताया कि चालू पेराई सीजन में राज्य में 125 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। 
 
पिछले साल के मुकाबले कम चल रही हैं मिलें
राज्य में चालू पेराई सीजन में 117 चीनी मिलों में पेराई चल रही है जबकि पिछले पेराई सीजन में राज्य में 119 चीनी मिलों में पेराई चल रही थी।