Home एग्रीकल्चर न्यूज किसानों की लं‌बित मांगों को लेकर देश भर के 250 किसान संगठनों का दिल्ली में मंथन शुरू
किसानों की लं‌बित मांगों को लेकर देश भर के 250 किसान संगठनों का दिल्ली में मंथन शुरू
किसानों की लं‌बित मांगों को लेकर देश भर के 250 किसान संगठनों का दिल्ली में मंथन शुरू

किसानों की लं‌बित मांगों को लेकर देश भर के 250 किसान संगठनों का दिल्ली में मंथन शुरू

सम्पूर्ण कर्ज माफी, फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागत का दोगुना तय के अलावा भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के साथ ही राष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौते जैसे किसानों के अनेक मुद्दों पर आगे की रणनीति तय करने के लिए देशभर के 250 किसान संगठन दो दिन विचार-विमर्श कर रहे हैं।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) का तीसरा राष्ट्रीय दो दिवसीय सम्मेलन आज से दिल्ली के मावलंकर हाल में शुरू हुआ है, जिसमें 25 राज्यों के 1,000 से ज्यादा प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। एआईकेएससीसी के राष्ट्रीय संयोजक वीएम सिंह ने बताया कि इस अधिवेशन में किसानों के सभी मुद्दों पर चर्चा की जायेगी, तथा उसके बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में यह वादा किया था कि फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागत का डेढ़ गुना यानि सी2 में 50 फीसदी जोड़कर तय किया जायेगा, लेकिन अभी सरकार ने अपना वादा पुरा नहीं किया है।

किसानों को फसलें समर्थन मूल्य से नीचे दाम पर बेचनी पड़ रही है

उन्होंने कहा कि सरकार वर्ष 2022 तक देश के किसानों की आय दोगुनी करने की बात तो कर रही है, लेकिन हकीकत में देश में किसानों की हालत बद से बदतर होती जा रही है, किसानों को फसलें समर्थन मूल्य से नीचे दाम पर बेचनी पड़ रही है। कई राज्यों में बेमौसम बारिश और बाढ़ से फसलों को नुकसान हुआ है, तथा किसानों को अभी तक ना तो राज्य सरकारों ने ना ही केंद्र सरकार ने कोई मदद दी है जिससे किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। देशभर में किसानों की आत्महताओं का दौर जारी है लेकिन सरकार को इन सब की फिक्र ही नहीं है।

जम्मू-कश्मीर में बेमौसम बर्फबारी से बागवानी फसलों को भारी नुकसान हुआ

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में बेमौसम बर्फबारी से बागवानी फसलों को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार ने किसानों के लिए कोई राहत पैकेज देने की घोषणा नहीं की है। गन्ना किसानों का पिछले पेराई सीजन 2018-19 का अभी भी चीनी मिलों पर बकाया है, जबकि चालू पेराई सीजन शुरू हुए दो महीने बीतने को हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी गन्ने का राज्य परमर्श मूल्य (एसएपी) भी तय नहीं किया है। उन्होंने बताया कि राज्यों के साथ ही केंद्र सरकार पराली का प्रबंधन करने के बजाए उल्टा किसानों पर ही केस दर्ज कर रही है।

देशभर के 250 किसान संगठन के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं 

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर के 250 किसान संगठन के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिसमें 100 से संगठनों के प्रतिनिधि अपने विचार रखेंगे। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में किसानों की सम्पूर्ण कर्ज माफी, भूमि अधिग्रहण कानून 2013, राष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौता, वन अधिकार कानून, ग्रामीण जनता को पेंशन, आवारा पशुओं से खेतों की रक्षा, किसानों को बीमा व मुआवजा, कृषि मजदूरों के लिए समग्र कानून, डेयरी क्षेत्र का संकट, कश्मीर के किसानों के संकट के साथ ही पराली प्रबंधन पर विचार-विमर्श किया जायेगा, तथा उसी के हिसाब से आगे की रणनीति तय की जायेगी।