Home एग्रीकल्चर न्यूज सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में 8 जनवरी को राष्ट्रीय ग्रामीण बन्द : एआईकेएससीसी
सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में 8 जनवरी को राष्ट्रीय ग्रामीण बन्द : एआईकेएससीसी
सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में 8 जनवरी को राष्ट्रीय ग्रामीण बन्द : एआईकेएससीसी

सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में 8 जनवरी को राष्ट्रीय ग्रामीण बन्द : एआईकेएससीसी

केंद्र एवं राज्य सरकारों की किसान विरोधी नीतियों का विरोध करने के लिए देशभर के 250 से ज्यादा किसान संगठनों ने 8 जनवरी को ‘राष्ट्रीय ग्रामीण बन्द’ का आयोजन करने का फैसला किया है। किसान संगठनों की लगातार मांग के बावजूद भी अभी तक संपूर्ण कर्ज मुक्ति और फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य सी2 पर 50 फीसदी जोड़कर तय नहीं किया गया है।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) का तीसरा राष्ट्रीय अधिवेशन दिल्ली में शनिवार को समाप्त हुआ जिसमें देशभर के 25 राज्यों के लगभग 800 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। किसान संगठनों ने 21 सूत्री मांगपत्र पर भी चर्चा की, जिनमें मुख्य रुप से वन अधिकार कानून को सख्ती के साथ अमल में लाना, आदिवासियों और किसानों के जबरन विस्थापन का विरोध, मुक्त व्यापार संधियों का विरोध जोकि खाद्य पदार्थो की डम्पिंग और विदेशी कंपनियों के खेती में हस्तक्षेप बढ़ाने एवं नियंत्रण करने की अनुमति देती हैं। कृषि मजदूरों व बटाईदार किसानों के हक के लिए एक समग्र कानून बनाने, कारपोरेट की लूट का विरोध करने के साथ ही सभी ग्रामीण लोगों के लिए 10,000 रुपये मासिक पेंशन देने की मांग की। इसके साथ ही फसल बीमा योजना तथा आपदा मुआवजा में सुधार करने के साथ ही जम्मू-कश्मीर के किसानों के नुकसान की भरपाई की मांग की गई।

देश तभी बचेगा, जब अन्नदाता बचेंगे

एआईकेएससीसी के संयोजक वीएम सिंह ने किसान प्रतिनिधियों से अपील की कि वे राजनीतिक दलों व सांसदों पर दबाव डालकर उन्हें किसानों की हक में आवाज उठाने को मजबूर करें। उन्होंने कहा कि देश तभी बचेगा, जब अन्नदाता बचेंगे। किसानों संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में काम के दिनों की संख्या को बढ़ाकर 200 दिन किया जाए, साथ ही खेती की लागत में कमी की जाए इसके अलावा आवारा पशुओं से खेती को हुए नुकसान की भरपाई केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर करें।

किसानों की सहमति के बगैर जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाये

वीएम सिंह ने कहा कि सभी संगठनों ने मिलकर केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि किसानों की सहमति के बगैर जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाये, तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली पीडीएस में मोटे अनाजों के साथ ही दलहन, तेल और चीनी का आवंटन किया जाए। चीनी मिलों को निर्देश दिए जाये कि गन्ना खरीदने के 14 दिनों के अंदर किसानों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए, समय पर बकाया नहीं चुकाने वाली चीनी मिलें किसानों को 15 फीसदी का ब्याज दे। इसके अलावा खेती तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया जाए, साथ ही खेती और डेयरी उद्योग को पूरी तरह से राष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौते से पूरी तरह से बाहर रखा जाए।

किसानों के हितों की योजना बने ताकि आत्महत्या जैसी नौबत नहीं आये

उन्होंने कहां कि सरकारी योजनाओं का लाभ सभी किसानों को मिले, चाहे वह बटाई पर खेती कराने वाला ही क्यों न हो? उन्होंने कहा कि आदिवासी किसानों के हितों की रक्षा करते हुए केंद्र सरकार वनाधिकार अधिनियम 2006 को पूर्ण रुप से लागू करे। उन्होंने कहा कि हमारी केंद्र और राज्य सरकारों से मांग है कि खेती को लाभदायक बनाने वाली नीतियां बनाई जा सके, जिससे कि किसी भी किसान को आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाना पड़े। अधिवेशन में राजू शेट्टी, हनन मौला, मेधा पाटकर, अतुल अंजान, डां आशीष मित्तल, डां सुनीलम, राजा राम सिंह, डां दर्शनपाल, सत्यवान, प्रतिभा शिन्दे, आविक सहा और किरन विस्सा शामिल थे।