Home एग्रीकल्चर न्यूज महाराष्ट्र में गन्ने का बकाया भुगतान करने वाली चीनी मिलों को ही मिलेंगे पेराई लाइसेंस
महाराष्ट्र में गन्ने का बकाया भुगतान करने वाली चीनी मिलों को ही मिलेंगे पेराई लाइसेंस
महाराष्ट्र में गन्ने का बकाया भुगतान करने वाली चीनी मिलों को ही मिलेंगे पेराई लाइसेंस

महाराष्ट्र में गन्ने का बकाया भुगतान करने वाली चीनी मिलों को ही मिलेंगे पेराई लाइसेंस

पहली अक्टूबर 2019 से शुरू होने वाले गन्ना पेराई सीजन 2109-20 में महाराष्ट्र की उन्हीं चीनी मिलों को पेराई लाइसेंस जारी किए जाएंगे,जिन्होंने 2018-19 के सीजन के लिए किसानों का 100 फीसदी भुगतान कर दिया है। राज्य की 195 चीनी मिलों में से अभी तक 130 मिलों ने ही 100 फीसदी भुगतान किया है।

राज्य के चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड ने आउटलुक को बताया कि राज्य की चीनी मिलों पर अब भी 589.59 करोड़ रुपये का बकाया है। इसलिए राज्य सरकार ने फैसला किया है कि आगामी पेराई सीजन के लिए उन्हीं मिलों को पेराई लाइसेंस जारी किए जाएंगे, जो किसानों को 100 फीसदी भुगतान कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि बकाया भुगतान करने के लिए मिलों के पास 31 सितंबर 2019 तक का समय है। 

गन्ना खरीदने के 14 दिनों के अंदर करना होता है भुगतान

उन्होंने बताया कि चीनी मिलों द्वारा किसानों को 14 दिनों के भीतर गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का भुगतान करना जरूरी है। इसलिए राज्य सरकार ने नए पेराई सीजन में गन्ना नियंत्रण आदेश, 1966 के तहत निर्धारित समय में ही भुगतान करने का आदेश जारी किया है। मिलों को महाराष्ट्र शुगर फैक्ट्रीज एक्ट, 1984 के तहत पेराई लाइसेंस जारी किए जाते हैं।

राज्य की 130 मिलों ने ही किया है पूरा भुगतान

चीनी आयुक्त ने बताया कि राज्य की मिलों ने चालू पेराई सीजन 2018-19 में 23,207.28 करोड़ रुपये मूल्य का गन्ना खरीदा है, जिसमें से 15 अगस्त 2019 तक 22,645.26 करोड़ रुपये का ही भुगतान हुआ है। इस तरह मिलों को अभी 589.59 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। उन्होंने बताया कि राज्य की 130 चीनी मिलों ने 100 फीसदी का भुगतान कर दिया है, जबकि 48 मिलों ने 80 से 99 फीसदी का भुगतान किया है।

चीनी उत्पादन में आएगी 41 फीसदी की गिरावट

उन्होंने बताया कि पिछले पेराई सीजन में राज्य में 107 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था, जबकि प्रारंभिक अनुमान के अनुसार चालू पेराई सीजन में राज्य में केवल 63 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। यह पिछले साल की तुलना में 41.12 फीसदी कम है। उन्होंने बताया कि मराठवाड़ा में सूखे से गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है। दूसरी ओर, कोल्हापुर और सांगली में बाढ़ से फसल को नुकसान हुआ है। ऐसे में चीनी उत्पादन के अनुमान में और कमी आने की आशंका है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू सीजन में राज्य में गन्ने की बुआई घटकर 8.40 लाख हेक्टेयर रह गई है। पिछले साल राज्य में 11 लाख हेक्टेयर में गन्ने की बुआई हुई थी।