Home एग्रीकल्चर न्यूज उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को सपा सरकार के दौर के बकाए पर मिलेगा ब्याज
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को सपा सरकार के दौर के बकाए पर मिलेगा ब्याज
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को सपा सरकार के दौर के बकाए पर मिलेगा ब्याज

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को सपा सरकार के दौर के बकाए पर मिलेगा ब्याज

उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों को गन्ना किसानों को बकाया भुगतान पर ब्याज देना होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने शपथ पत्र देकर गन्ने के बकाया पर ब्याज का भुगतान करने की बात मान ली है। राज्य के किसानों के बकाए पर ब्याज करीब 2,000 करोड़ रुपये था, जिसे सपा की तत्कालीन अखिलेश सरकार ने माफ कर दिया था। बकाया भुगतान 2011 से चार वर्षों का है।

राज्य सरकार ने हलफनामे में दी ब्याज भुगतान की जानकारी

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन की याचिका पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में राज्य के गन्ना आयुक्त संजय आर. भूसरेड्डी ने हलफनामा देकर बकाया पर ब्याज देना स्वीकार कर लिया। हफलनामे के अनुसार राज्य की जो चीनी मिलें फायदे में हैं, वे किसानों को बकाए पर 12 फीसदी का ब्याज तथा जो चीनी मिलें घाटे में चल रही है वे 7 फीसदी ब्याज देंगी।

इस फैसले से 42 लाख किसान प्रभावित

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह ने आउटलुक को बताया कि यह राज्य के 42 लाख किसानों की जीत है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की ओर से यह स्वीकारोक्ति अदालत मे केस दायर होने के 25 महीने बाद आई है। वह भी तब जब 5 फरवरी 2019 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राज्य सरकार दो महीने में 9 मार्च 2017 के आदेश का अनुपालन करें, नहीं तो गन्ना आयुक्त को जेल जाना पड़ेगा।

वीएम सिंह ने इस केस के कारण छोड़ा लोकसभा चुनाव

इलाहाबाद हाईकोर्ट में 5 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई होनी थी, इसी को देखते हुए वीएम सिंह ने लोकसभा 2019 का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए एक चुनाव तो क्या 10 चुनाव भी छोड़ने पड़ें तो, छोड़ दूंगा।

तत्कालीन अखिलेश सरकार ने ब्याज देने के फैसले को किया था रद्द

वीएम सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के बकाया भुगतान ब्याज समेत दिए जाने का आदेश दिया था जिसको तत्कालीन अखिलेश सरकार की कैबिनेट ने फैसला कर माफ कर दिया था। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के इस फैसले से जहां राज्य के लाखों किसान प्रभावित हुए, वहीं किसानों के बकाया तत्काल भुगतान का रास्ता भी बंद हो गया, क्योंकि जब चीनी मिलों को ब्याज ही नहीं देना पड़ेगा, तो फिर भुगतान मिलें अपनी मर्जी से करेंगी।

राज्य के करीब 40-42 लाख किसान परिवारों का है बकाया

उन्होंने बताया कि राज्य के करीब 40 से 42 लाख किसान परिवारों का गन्ने का ब्याज बकाया है। अदालत ने साल 2011-12, 2012-13 और 2013-14 तथा 2014-15 के जिस बकाये पर ब्याज देने को कहा है वह रकम 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा होती है। उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी (सपा) की तत्कालीन अखिलेश सरकार ने कैबिनेट में बकाया का ब्याज भुगतान माफ करने का प्रस्ताव पारित किया था, जिस कारण अखिलेश सरकार को किसानों की नाराजगी झेलनी पड़ी और उनकी पार्टी सत्ता से बाहर हो गई।