Home एग्रीकल्चर न्यूज ग्रामीण भारत बंद के कारण दूध, अनाज, फल एवं सब्जियों की आवक हुई प्रभावित
ग्रामीण भारत बंद के कारण दूध, अनाज, फल एवं सब्जियों की आवक हुई प्रभावित
ग्रामीण भारत बंद के कारण दूध, अनाज, फल एवं सब्जियों की आवक हुई प्रभावित

ग्रामीण भारत बंद के कारण दूध, अनाज, फल एवं सब्जियों की आवक हुई प्रभावित

देश के किसान और श्रमिक संगठनों द्वारा किए गए ग्रामीण भारत बंद के कारण दूध, अनाज, फल एवं सब्जियों की आवक प्रभावित हुई। किसानों की लंबीत मांगों को लेकर देशभर के 250 किसान संगठनों ने अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के बैनर तले इसका आयोजन किया।

किसान संगठनों के अनुसार ग्रामीण भारत बंद के कारण अनाज, दूध, सब्जियों के साथ ही फल लेकर शहर नहीं गए। किसान गांव में ही रहे तथा बंद पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा। किसान संगठनों के अनुसार ग्रामीण भारत बंद करने का मुख्य मकसद किसानों की मांगों के प्रति सो रही केंद्र और राज्य सरकारों को जगाना है।

एआईकेएससीसी के संयोजक वीएम सिंह ने आउटलुक को बताया कि देशभर के किसानों ने ग्रामीण भारत बंद में भाग लिया। इस दौरान किसान गांव में रहे। वीएम सिंह ने कहा कि सरकारों के लिए किसान केवल वोट बैंक बनकर रह गया है, चुनाव के समय पार्टियां किसानों के लिए अपने घोषणा पत्र में बड़े-बड़े दावे तो करती हैं लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद किसानों को भुला दिया जाता है।

भाजपा ने अपने घोषण पत्र में फसलों का डेढ़ गुना दाम करने का वादा किया था

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वर्ष 2014 के अपने घोषणा पत्र में फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत का डेढ़ गुना करने का वादा किया था, जिसको अभी तक पूरा नहीं किया गया है। इसी तरह से गन्ने का भुगतान 14 दिन के अंदर करने का वादा किया था, लेकिन पिछले पेराई सीजन का बकाया भुगतान भी अभी तक चीनी मिलों ने किसानों को नहीं दिया है जबकि नया पेराई सीजन शुरू हुए तीन महीन बीत चुके हैं।

संपूर्ण कर्जमाफी एवं गन्ने का समय पर भुगतान आदि मांगे

किसान संगठनों की मुख्य मांगों में संपूर्ण कर्ज माफी के साथ ही स्वामीनाथन आयोग के आधार फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत का डेढ़ गुना तय करने साथ ही खरीद की गारंटी, 60 वर्ष से अधिक आयु के किसानों को न्यूनतम 5,000 रुपये मासिक पेंशन, फसल बीमा योजना में नुकसान के आंकलन के लिए किसान के खेत को आधार मानना, विकास के नाम पर किसानों की जमीन छीनकर उन्हें विस्थापित करने पर रोक लगाने, वनाधिकार कानून पास करने, गन्ना किसानों को 14 दिन के अंदर भुगतान अन्यथा ब्याज देने, आवारा पशुओं से फसलों के नुकसान को रोकने तथा मनरेगा को खेती से जोड़कर 250 दिन काम देने के साथ ही मंडियों में समर्थन मूल्य से नीचे दाम पर फसल खरीदने वालों को जेल और जुर्माने का प्रावधान करने इत्यादि हैं।

किसानों को नहीं मिल रहा फसलों का उचित दाम

अचल कुमार शर्मा, जिला युवा प्रभारी राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन, बिजनौर ने बताया कि बंद में जिले के सभी किसानों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि किसानों को फसलों का उचित दाम नहीं मिल रहा। बंद के कारण गन्ना किसानों ने चीनी मिलों में गन्ना भी नहीं डाला। साथ ही दूध और सब्जियों को लेकर भी शहर में बेचने नहीं गए। उन्होंने बताया कि चीनी मिलों ने गन्ना किसानों का पिछले साल का बकाया भुगतान भी नहीं किया है, जबकि चालू पेराई सीजन में पैमेंट में देरी हो रही है। अंजनी कुमार दीक्षित, जिला प्रभारी राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जनपद खीरी ने बताया कि गन्ने किसानों को समय से पर्चीयां नहीं मिल रही है। धान की समर्थन मूल्य पर खरीद सीमित मात्रा में होने के कारण अधिकांश किसानों को औने-पौने दाम पर बेचना पड़ी थी।

केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने किया भारत बंद

मजदूर संघों के केंद्रीय संगठनों ने भी केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बंद का ऐलान किया है। केंद्रीय श्रमिक संगठनों की 12 सूत्रीय प्रमुख मांगों में देश में मजदूरों के लिए लागू हुए नए श्रम कानून को लेकर है और सरकार से उनकी मांग है कि वह इस कानून को वापस ले। इस भारत बंद में 19 केंद्रीय ट्रेड यूनियन शामिल हैं।