Home एग्रीकल्चर न्यूज चना, सरसों के किसानों को नहीं मिल रहा समर्थन मूल्य, मंडियों में भाव 900-1,200 रुपये तक आए नीचे
चना, सरसों के किसानों को नहीं मिल रहा समर्थन मूल्य, मंडियों में भाव 900-1,200 रुपये तक आए नीचे
चना, सरसों के किसानों को नहीं मिल रहा समर्थन मूल्य, मंडियों में भाव 900-1,200 रुपये तक आए नीचे

चना, सरसों के किसानों को नहीं मिल रहा समर्थन मूल्य, मंडियों में भाव 900-1,200 रुपये तक आए नीचे

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान के बाद अब सरसों और चना किसानों पर कीमतों की मार भी पड़ रही है। उत्पादक मंडियों में चना और सरसों के दाम घटकर समर्थन मूल्य से 900 से 1,200 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे आ गए हैं, जिस कारण किसानों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है।

कर्नाटक की गुलबर्गा मंडी के दलहन कारोबारी चंद्रशेखर एस नादर ने बताया कि मंडी में चना के दाम घटकर 3,600 से 3,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। केंद्र सरकार ने चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 के लिए चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,875 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। उन्होंने बताया कि चालू रबी में चना का रिकार्ड उत्पादन होने का अनुमान है, इसलिए आगे चना की नई फसल की दैनिक आवक कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान की मंडियों में बढ़ेगी।

सरसों के भाव घटकर 3,500-3,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए

राजस्थान के भरतपुर जिले की कामामंडी में सरसों के भाव घटकर 3,500 से 3,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं जबकि चालू रबी सीजन के लिए सरसों का एमएसपी 4,425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। मंडी के तिलहन कारोबारी राजकुमार जैन ने बताया कि फरवरी और मार्च में हुई बेमौसम बारिश से सरसों की फसल को काफी नुकसान हुआ है। इसीलिए मौसम साफ होते ही किसानों ने सरसों की कटाई तेज कर दी है। उन्होंने बताया कि मंडी में दैनिक आवक 3,000 से 3,500 क्विंटल की हो रही है तथा आगे दैनिक आवक और बढ़ेगी।

20-21 मार्च को फिर मौसम खराब होने की आशंका

भारतीय मौसम विभाग उत्तर भारत के कई राज्यों में 20-21 मार्च से फिर मौसम खराब होने का अनुमान है। उत्तर के पहाड़ी राज्यों के साथ ही पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश के साथ ही ओलावृष्टि होने की संभावना है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार चना का उत्पादन चालू रबी में बढ़कर रिकार्ड 112.2 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल 99.4 लाख टन का उत्पादन हुआ था। हालांकि सरसों का उत्पादन चालू रबी में 91.13 लाख टन ही होने का अनुमान है जोकि पिछले साल के 92.56 लाख टन से कम है।