Home एग्रीकल्चर न्यूज दुर्दशा से परेशान किसान बजट सत्र से पहले दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे, वर्धा सम्मेलन में फैसला
दुर्दशा से परेशान किसान बजट सत्र से पहले दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे, वर्धा सम्मेलन में फैसला
दुर्दशा से परेशान किसान बजट सत्र से पहले दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे, वर्धा सम्मेलन में फैसला

दुर्दशा से परेशान किसान बजट सत्र से पहले दिल्ली में प्रदर्शन करेंगे, वर्धा सम्मेलन में फैसला

आगामी आम बजट से पहले देश के किसान बड़ा आंदोलन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। महाराष्ट्र में वर्धा के सेवाग्राम में हुए राष्ट्रीय किसान सम्मेलन में शामिल हुए 14 राज्यों के किसान प्रतिनिधियों ने फैसला किसा है राष्ट्रीय किसान समन्वय समिति सरकार को पत्र लिखकर मांग करेगी कि केंद्र और राज्य सरकार 50 फीसदी बजट किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए आवंटित करें। इस मांग को लेकर बजट स्तर से पहले दिल्ली में प्रदर्शन किया जाएगा और पूरे देश में सत्याग्रह का आह्वान किया जाएगा।

किसानों की स्थिति सुधारने को 26 सूत्रीय प्रस्ताव

सम्मेलन में किसानों की बिगड़ती स्थिति और सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये पर चिंता व्यक्त की गई। प्रतिनिधियों ने 26 सूत्रीय प्रस्ताव को महत्वपूर्ण मानकर उन्हें लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया है। इसके लिए फैसला किया गया कि किसानों के बीच जाकर इन प्रस्तावों के बारे में उन्हें अवगत कराया जाए और राष्ट्रीय आंदोलन खड़ा किया जा। इस प्रस्ताव को लागू करवाने के लिए समन्वय समिति अगले साल मई या जून में सत्याग्रह आंदोलन चलाएगी।

कृषि के लिए 50 फीसदी बजट की मांग

केंद्र और राज्य सरकारों को 50 फीसदी बजट कृषि और किसानों के लिए आवंटित करना चाहिए। इस मांग को लेकर बजट सत्र के समय विशाल प्रदर्शन के लिए समन्वय समिति किसान संगठनों में समन्वय बनाने का प्रयास करेगी। इस काम के लिए एक कमेटी बनाई गई है जिसमें विवेकानंद, दशरथ कुमार, सुखदेव सिंह, दयाकिशन शर्मा और विकल पचार को शामिल किया गया है। सरकार की नीतियों से खेती और गांवों पर पड़ रहे बुरे असर का मूल्यांकन किया गया और विकास योजनाओं को किसानों के हितों के अनुरूप बदलने पर जोर दिया गया।

कृषि क्षेत्र कंपनियों को सौंपने का आरोप

सम्मेलन में वक्ताओं ने किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब मूल्य और प्राकृतिक संसाधनों में उनकी हिस्सेदारी पर जोर दिया। किसानों की मेहनत की वाजिब कीमत को लेकर सरकार से सवाल किया जाना चाहिए। सरकार ने कृषि अनुसंधान, प्रशिक्षण और शिक्षा के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों से नौ समझौते किए हैं। इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि विश्वविद्यालयों के नियमों में संशोधन किया जा रहा है। सम्मेलन में आरोप लगाया गया कि यह सब भारतीय कृषि को बहुराष्ट्रीय कंपनियों को सौंपने के लिए किया जा रहा है। वक्ताओं ने इस समझौतों को रद्द करने की मांग की।

छत्तीसगढ़, यूपी के आंदोलन पर चिंता

सम्मेलन में उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसानों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलनों पर भी विचार किया गया। छत्तीसगढ़ में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बेचने में दिक्कतें आ रही हैं। सम्मेलन में किसान विरोधी बीज नीति और कंपनियों को फायदा पहुंचाने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का भी विरोध किया गया।

स्वाबलंबी किसान मॉडल का प्रारूप तैयार होगा

सम्मेलन में देश को चार-पांच क्षेत्रों को चुनकर वहां गांव और किसानों को समृद्ध एवं स्वाबलंबी बनाने के लिए मॉडल विकसित करने के लिए प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके लिए पांच सदस्यों की एक समिति बनाई गई है। सम्मेलन में समन्वय समिति के संयोजक विवेकानंद का कार्यकाल पूरा होने के बाद इस पद पर राजस्थान किसान यूनियन के दशरथ कुमार को चुना गया।