Home एग्रीकल्चर न्यूज अधिक प्रोटीन युक्त गेहूं की नई किस्म एचडी-3226 का बीज किसानों को अक्टूबर में मिलेगा
अधिक प्रोटीन युक्त गेहूं की नई किस्म एचडी-3226 का बीज किसानों को अक्टूबर में मिलेगा
अधिक प्रोटीन युक्त गेहूं की नई किस्म एचडी-3226 का बीज किसानों को अक्टूबर में मिलेगा

अधिक प्रोटीन युक्त गेहूं की नई किस्म एचडी-3226 का बीज किसानों को अक्टूबर में मिलेगा

देश में विकसित अब तक के सबसे अधिक प्रोटीन युक्त गेहूं की नई किस्म एचडी-3226 (पूसा यशस्वी) की बुआई इस बार रबी में किसान कर सकेंगे। पूसा संस्थान से इसका बीज अक्टूबर में किसानों को मिलेगा, इसकी प्रति हेक्टेयर औसत पैदावार 57.5 क्विंटल है। पीला रतुआ,सफेद रतुआ के साथ ही यह किस्म करनाल बंट रोग रोधी है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के अनुवांशिक विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजबीर यादव ने आउटलुक को बताया कि गेहूं की नई किस्म एचडी-3,226 के बीज किसानों को अक्टूबर से पूसा कैंपस से मिलेंगे, हालांकि चालू रबी में बीज सीमित मात्रा में ही उपलब्ध होंगे। उन्होंने बताया कि इसके बीज तैयार करने के लिए हाल ही में 35 से 40 प्राइवेट बीज कंपनियों से एमओयू किया गया है।अत: अगले साल से इसके बीज किसानों को भरपूर मात्रा में मिलेंगे।

प्रोटीन की मात्रा सबसे ज्यादा 12.8 फीसदी

उन्होंने बताया कि इस किस्म की सबसे खास बात यह है कि इसमें प्रोटीन की मात्रा अन्य किस्मों की तुलना में 0.50 फीसदी ज्यादा है। इसमें 12.8 फीसदी प्रोटीन है जबकि गेहूं की दूसरी किस्मों में अधिकतम 12.3 फीसदी प्रोटीन होता है। उन्होंने बताया कि इस किस्म में ग्लूटेन की मात्रा भी ज्यादा है।

नई किस्म पीला रतुआ, भूरा रतुआ और करनाल बंट रोग रोधी

उन्होंने बताया कि गेहूं की नई किस्म पीला रतुआ, भूरा रतुआ और करनाल बंट रोग रोधी है। इन बीमारियों से हर साल किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि एचडी-3,226 किस्म की बुआई का उपयुक्त समय अक्टूबर अंत या फिर नवंबर का प्रथम पखवाड़ा है। भरपूर पैदावार लेने के लिए 20 नवंबर से पहले किसानों को इस किस्म की बुआई करनी होगी। इसकी औसतन पैदावार 57.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, लेकिन परीक्षण के समय इसका अधिकतम उत्पादन 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हुआ है। इसकी फसल 142 दिन में तैयार हो जाती है। यह किस्म पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड के तराई क्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर एवं हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए उपयुक्त है। जीरो ट्रिलेज पद्धति से बुआई के लिए भी यह किस्म उपयुक्त है।