Home एग्रीकल्चर न्यूज समर्थन मूल्य से 800 रुपये तक नीचे भाव पर अरहर बेचने को मजबूर हैं किसान
समर्थन मूल्य से 800 रुपये तक नीचे भाव पर अरहर बेचने को मजबूर हैं किसान
समर्थन मूल्य से 800 रुपये तक नीचे भाव पर अरहर बेचने को मजबूर हैं किसान

समर्थन मूल्य से 800 रुपये तक नीचे भाव पर अरहर बेचने को मजबूर हैं किसान

केंद्र सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य लेकर चल रही है लेकिन अरहर किसान अपनी फसल मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 700-800 रुपये नीचे भाव पर बेचने को मजबूर हैं। हालांकि उपभोक्ताओं को अरहर दाल अभी भी 80 से 100 रुपये प्रति किलो के दाम पर ही खरीदनी पड़ रही है।

कर्नाटक की गुलबर्गा मंडी के दलहन कारोबारी चंद्रशेखर एस नादर ने बताया कि मंडी में अरहर के भाव 5,000 से 5,100 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए अरहर का समर्थन मूल्य 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। उन्होंने बताया कि आयातित अरहर सस्ती है, जिस कारण घरेलू मंडियों में कीमतें नीचे बनी हुई हैं। गुलबर्गा मंडी में अरहर की दैनिक आवक 10 से 12 हजार क्विंटल की हो रही है। मुंबई के दलहन आयातक सुरेश उपाध्याय ने बतया कि म्यांमार से आयातित अरहर के भाव मुंबई में 4,900 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अनुसार शुक्रवार को बंगलुरु में अरहर दाल का भाव 96 रुपये, हैदराबाद में 85 रुपये, सोलन में 93 रुपये, मंडी में 100 रुपये और भटिंडा में 86 रुपये प्रति किलो रहे।

सीमित मात्रा में ही खरीद कर रही है नेफेड

नेफेड तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात तथा आंध्रप्रदेश की मंडियों से अरहर की समर्थन मूल्य पर खरीद तो कर रही है लेकिन खरीद नाममात्र की ही रही है। नेफेड के अनुसार 13 फरवरी तक इन राज्यों से 46,274 टन अरहर की खरीद ही की गई है। सूत्रों के अनुसार चालू सीजन में समर्थन मूल्य पर 5,45,573 टन अरहर खरीद करने का लक्ष्य तय किया है जिसमें से कनार्टक से 1,82,875 टन की खरीद की योजना है जबकि कर्नाटक से 13 फरवरी तक केवल 10,113 टन की खरीद ही हुई है।

चालू वित्त वर्ष के लिए 5.75 लाख टन अरहर का आयात कोटा

केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 5.75 लाख टन अरहर (चार लाख टन दाल मिलों के माध्यम से और 1.75 लाख टन सरकारी सत्र पर) आयात की अनुमति दी हुई है, जिसमें से दाल मिलें अपने कोटे का आयात पहले ही कर चुकी हैं तथा सरकार सत्र पर भी करीब डेढ़ लाख टन अरहर का आयात हो चुका है। केंद्र सरकार ने अफ्रीकी देश मोजाम्बिक से अरहर के आयात का अनुबंध किया हुआ है।

उत्पादन में कमी आने का अनुमान

कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2019-20 में अरहर का उत्पादन घटकर 35.4 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि इसके पिछले साल 35.9 लाख टन का उत्पादन हुआ था। फसल सीजन 2017-18 में देश में रिकार्ड 42.9 लाख टन अरहर का उत्पादन हुआ था।