Home एग्रीकल्चर न्यूज कोरोना का असर - किसान 25 फीसदी नीचे दाम पर दूध बेचने को मजबूर, महाराष्ट्र सरकार खरीद जारी रखेगी
कोरोना का असर - किसान 25 फीसदी नीचे दाम पर दूध बेचने को मजबूर, महाराष्ट्र सरकार खरीद जारी रखेगी
कोरोना का असर - किसान 25 फीसदी नीचे दाम पर दूध बेचने को मजबूर, महाराष्ट्र सरकार खरीद जारी रखेगी

कोरोना का असर - किसान 25 फीसदी नीचे दाम पर दूध बेचने को मजबूर, महाराष्ट्र सरकार खरीद जारी रखेगी

कोरोना काल में दूध की खपत घटने की सीधी मार किसानों पर पड़ी है। खपत कम होने की वजह से किसानों को दूध 25 फीसदी तक नीचे दाम पर बेचने को मजबूर हैं। महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई अंत तक राज्य के किसानों से 25 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध की खरीद जारी रखने का फैसला किया है।

होटल, रेस्तरां, कैंटीन और हलवाई की दुकानों में दूध की खपत घट जाने से इसकी कीमतों में गिरावट आई है। लॉकडाउन से पहले किसान जिस भाव पर दूध बेच रहे थे, उसके मुकाबले अब करीब 25 फीसदी कम भाव पर बेचने को मजबूर हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है, जहां रोजाना करीब 50 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है। कोरोना काल में शादी-समारोह व अन्य बड़े आयोजनों पर पाबंदी होने और होटल, रेस्तरां तथा कैंटीन ठीक ढंग से नहीं खुलने के कारण दूध और इससे बने उत्पाद खासतौर से आइसक्रीम की मांग पर असर पड़ा है। इसी वजह से खपत कम हो जाने के कारण किसानों को दूध का उचित भाव नहीं मिल रहा है।

अनलॉक होने पर इस महीने दूध के दाम में हल्का सुधार जरुर आया है

उत्तर प्रदेश के 10 जनपदों में किसानों से दूध खरीदने वाले किसान उत्पादक संगठन सहज मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के सीईओ बसंत चौधरी ने बताया कि कोरोना का कहर बरपने से पहले किसानों को जहां एक किलो दूध का भाव 44 रुपये मिलता था, वहां देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान दूध का भाव 30 रुपये प्रति किलो तक गिर गया था। हालांकि अनलॉक होने पर इस महीने दूध के दाम में थोड़ा सुधार हुआ है। बसंत चौधरी ने बताया कि इस समय उनकी कंपनी किसानों से 37 रुपये प्रति लीटर दूध खरीद रही है। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी दरअसल किसानों का ही संगठन है, इसलिए थोड़ा ज्यादा भाव पर दूध खरीद रही है, लेकिन निजी डेयरी कंपनियां इस समय भी 32 से 33 रुपयेक प्रति लीटर के भाव पर दूध खरीद रही है।

दूध की खपत कम होने से किसानों को उचित भाव नहीं मिल पा रहा है

आनंदा डेयरी के चेयरमैन राधेश्याम दीक्षित ने भी कहा कि दूध की खपत कम होने से किसानों को उचित भाव नहीं मिल पा रहा है। इस बीच सरकार ने 15 फीसदी आयात शुल्क पर टैरिफ रेट कोटा के तहत 10,000 टन मिल्क पाउडर का आयात करने की अनुमति दी है। विदेशों से सस्ता मिल्ड पाउडर आयात होने से दूध की खपत पर और असर पड़ने की संभावना है। गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक डॉ. आर.एस. सोढ़ी इसे असमय लिया गया फैसला करार देते हैं। उनका कहना है कि दूध उत्पादन की लागत भारत में विदेशों से ज्यादा है। इसलिए मिल्क पाउडर आयात का प्रभाव आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा। डेयरी उद्योग कोराना काल में खपत से ज्यादा जो दूध बचता है, उसका इस्तेमाल मिल्ड पाउडर और घी बनाने में कर रहा है। बसंत चौधरी बताते हैं कि मिल्क पाउडर की सप्लाई ज्यादा होने से दूध के दाम पर दबाव बना हुआ है।

महाराष्ट्र सरकार किसानों से 25 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध खरीद रही है

महाराष्ट्र के पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री सुनील केदार ने सोमवार को कहा कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने फैसला किया है कि किसानों से 25 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध की खरीद 31 जुलाई तक जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि हमनें केंद्र से मदद मांगी थी, लेकिन केंद्र सरकार ने कोई मदद नहीं दी। इसके बावजूद भी राज्य सरकार दूध की खरीद जारी रखने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय बोझ के बावजूद भी राज्य सरकार किसानों से करीब 10 लाख लीटर दूध दैनिक आधार पर खरीद रही है। कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने लॉकडाउन 31 जुलाई तक बढ़ा दिया है।

एजेंसी इनपुट