Home एग्रीकल्चर न्यूज चौधरी चरण सिंह मेमोरियल लेक्चर में बोले वीरेंद्र सिंह- वह ऑलराउंडर किसान नेता थे
चौधरी चरण सिंह मेमोरियल लेक्चर में बोले वीरेंद्र सिंह- वह ऑलराउंडर किसान नेता थे
चौधरी चरण सिंह मेमोरियल लेक्चर में बोले वीरेंद्र सिंह- वह ऑलराउंडर किसान नेता थे

चौधरी चरण सिंह मेमोरियल लेक्चर में बोले वीरेंद्र सिंह- वह ऑलराउंडर किसान नेता थे

इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट में गुरुवार को चौधरी चरण सिंह मेमोरियल लेक्चर में केंद्रीय मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जीवन के बहाने कृषि और राजनीति के विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह का सबसे बड़ा योगदान यह है कि उनके बाद बड़े से बड़ा नेता, भावी प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री, पदस्थ प्रधानमंत्री सबने अपने भाषण में 5 मिनट कृषि पर बोलना शुरू किया। इस लेक्चर की थीम ‘यूनिवर्सल सिस्टम और अविभाजित समाज में सामाजिक और आर्थिक न्याय की स्थिति’ रही। कार्यक्रम में वरिष्ठ जजों, वकीलों, पत्रकारों, अकादमिक जगत और चौधरी चरण सिंह के साथ जुड़े रहे लोगों ने हिस्सा लिया और अपने संस्मरण साझा किए।

किसानों के लिए चौधरी चरण सिंह के योगदान पर वीरेंद्र सिंह ने कहा कि पहले किसान परिवार से उठकर आने वाले नेता ऑलराउंडर थे। आज का नेता ऑलराउंडर नहीं है। उसे सत्ता के लिए नेता बनना है, लोगों के नहीं। चौधरी चरण सिंह के बारे में यह कहा जाए कि वह एक बिरादरी के नेता थे तो यह अन्याय है।

'कृषि क्षेत्र को बनाना होगा लाभकारी'

उन्होंने कहा कि आज हम किसान को अन्नदाता बोलते हैं और मान लेते हैं कि इसको नाराज मत होने दो लेकिन ऊपर उठने का मौका भी मत दो। हमारे अंदर बहुत सी चीजें ऐसी है, जिनका समाधान हम नहीं निकालते। कृषि क्षेत्र उनमें से एक है। इसे लाभकारी बना दो। वह सिर्फ लागत पर कुछ पैसे देने से नहीं होगा।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं जब कॉलेज में पढ़ता था तब मेरे प्रोफेसर की सैलरी 270 रुपए थी। आज उसे सवा लाख से डेढ़ लाख रुपए मिलते हैं। उसी दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य तय हुआ था। वह 66 रुपए था। वह आज बढ़कर 2000 रुपए से भी कम है। अगर देखा जाए तो आज के हिसाब से किसान का 6000 रुपए प्रति क्विंटल बनता है। 

पीएम किसान योजना का जिक्र

उन्होंने कहा कि हम आज नेता को इस दृष्टि से देखने लगे हैं कि उसका काफिला कितना बड़ा है। उसके पास पैसा कितना है। इसके उलट सादगी वाले चौधरी चरण सिंह का राजनीति में कद बहुत ऊंचा था। उनके अपने मापदंड थे। उनका सम्मान था। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पीएम किसान योजना के तहत किसानों को 6000 रुपए की निधि देने का ऐलान किया है।

'चौधरी साहब के काम को आगे नहीं बढ़ाया गया'

इस मौके पर 'आउटलुक' के संपादक हरवीर सिंह ने कहा कि चौधरी चरण सिंह के सार्वजनिक जीवन में दो पेशों का योगदान रहा। एक आपका पेशा वकालत का और एक हमारा पेशा पत्रकारिता का। आप लोगों ने एक ऐसा व्यक्ति हमें दिया, जो आगे चलकर देश का प्रधानमंत्री बना। वह रूरल इकॉनमी, किसानों, सामाजिक-धार्मिक सहिष्णुता के पैरोकार थे।

चौधरी चरण सिंह की ईमानदारी पर सवाल ही नहीं उठाया जा सकता लेकिन अगली पीढ़ी के लोगों में ईमानदारी और उस तरह की राजनीति बची नहीं है। आज भी कई लोग उन्हें सिर्फ जाट नेता लिखकर सीमित कर देते हैं। भूमि सुधार में उन्होंने काफी काम किया। भूमि सुधार कानून के लिए उनके स्थानीय से लेकर केंद्र सरकार से झगड़े हुए तब वह कानून लागू हुआ। उनके काम को उस तरह आगे नहीं बढ़ाया गया।

'नेताओं के पास मूल विचार और वैकल्पिक सोच का अभाव'

उन्होंने कहा कि उनकी नीतियों की दरकरार बहुत ज्यादा है। बहुत सारे बदलाव आए। ग्रामीण भारत में भी बदलाव आए। जिस आबादी को वह मजबूत करना चाहते थे, उसके लिए कोई बड़ा नेतृत्व नजर नहीं आता। आंकड़े आज छिपाए जा रहे हैं। अभी भी बहुसंख्यक आबादी गांवों में है और खेती या उससे जुड़े काम-धंधों पर निर्भर है। उनकी हालत खराब है। देश के संसाधनों में उनका हिस्सा कम हो रहा है। चौधरी साहब ने किसानों पर, रूरल इकॉनमी पर किताबें लिखीं। आज नेताओं के पास कोई मूल विचार नहीं है। कोई वैकल्पिक सोच नहीं है। लोकसभा चुनावों की तैयारी शुरू हो गई है। कुछ दिनों में घोषणापत्र जारी हो जाएंगे लेकिन क्या आपको लगता है कि मूल विचार पर चर्चा हो रही है। कांग्रेस से निकलकर चौधरी साहब वैकल्पिक सोच लेकर आए थे। उन्होंने विकल्प दिया तो लोग जुट गए और आगे बढ़े। मंदसौर फायरिंग के बाद लगा कि किसान खड़ा हो गया लेकिन आज किसानों का कोई संगठन इतना मजबूत नहीं है। चौधरी साहब लिखकर अपनी बातों से लोगों को भरोसे में लेते थे। अभी ऐसा कोई नहीं करता।