Home एग्रीकल्चर न्यूज हिमाचल में सेब किसानों पर संकट, कोरोना से हुई मजदूरों की कमी, अब फंगल बीमारी का हमला
हिमाचल में सेब किसानों पर संकट, कोरोना से हुई मजदूरों की कमी, अब फंगल बीमारी का हमला
हिमाचल में सेब किसानों पर संकट, कोरोना से हुई मजदूरों की कमी, अब फंगल बीमारी का हमला

हिमाचल में सेब किसानों पर संकट, कोरोना से हुई मजदूरों की कमी, अब फंगल बीमारी का हमला

हिमाचल प्रदेश में सेब उगाने वाले किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। पहले ही ये कोरोना महामारी के कारण मजदूरों की अभूतपूर्व कमी से जूझ रहे हैं और अब एक और संकट की चपेट में आ गए हैं। दरअसल वे अब सेब की स्कैब बीमारी को लेकर परेशान है। सेब की स्कैब एक पौधे की बीमारी है जो कवक वेंचुरिया इनएक्वॉलिस के कारण होती है।

हिमाचल की सेब अर्थव्यवस्था 4,500 करोड़ रुपये की है, और राज्य के उच्च उपज वाले सेब बेल्ट में फंगल रोग के प्रकोप ने सेब उत्पादकों को बड़े संकट में डाल दिया है।

मंडी और कुल्लू जिलों में सेब के बागों में शुरू में स्कैब की सूचना मिली थी।  लेकिन जैसे-जैसे कटाई का मौसम बढ़ता जा रहा है, यह फैलता गया है।

बागवानी विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की कि शिमला में रोहड़ू, जुब्बल-कोटखाई, चौपाल और कोटगढ़ बेल्ट में 1000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फंगल संक्रमण फैल गया है। बागवानी विभाग के उप निदेशक डॉ देस राज कहते हैं,
“बीमारी लगभग 38 वर्षों के बाद फिर से जीवित हो गई है।  हम प्रसार पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं और कुछ क्यूरेटिव कदम भी सुझाए हैं। '' 

सेब की स्कैब बीमारी में के फल पर काले धब्बे हो जाते हैं और इसकी गुणवत्ता बिगड़ जाती है।

किसानों का कहना है कि जब फंगस सेब को संक्रमित करता है, तो काले धब्बे पहले पत्तियों पर और बाद में फलों पर दिखाई देते हैं।  यह फलों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और बाजार में ऐसे सेब का कोई भी खरीदार नहीं मिलता है।

डॉ वाई एस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री के पूर्व कुलपति डॉ विजय सिंह ठाकुर कहते हैं, '' मैंने 1982-2000 के आंकड़ों के आधार पर 4 मई को इस बीमारी के फैलने की भविष्यवाणी की थी।  अफसोस की बात है कि कई किसानों और बागवानी विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।  यदि तत्काल निवारक उपाय नहीं किए जाते हैं, तो रोग 60 से 70 प्रतिशत सेब को प्रभावित कर सकता है। ”

फंगल संक्रमण फैलने को लेकर डॉ ठाकुर ने सेब उत्पादकों पर  आरोप लगाते हुए कहा कि वे रसायनों के छिड़काव का पालन नहीं करते हैं।   वह प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों को भी फंगल रोग के प्रकोपका जिम्मेदार ठहराते हैं।

पीड़ित किसानों ने कोविड -19 से स्कैब रोग की तुलना करना शुरू कर दिया है। सेब उगाने वाले हरीश चौहान कहते हैं, "एक तरफ जहाँ नोवल कोरोनोवायरस लोगों की जानें ले रहा है। वहीं यह फंगस संक्रमण एक और कोरोनावायरस की तरह दुख पैदा कर रहा है।" 

हालांकि डॉ ठाकुर आश्वस्त करते हैं कि इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है, उन्होंने दावा किया कि राज्य के पास इसका इलाज करने के लिए वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीक है।

कोटखाई के सेब के  बागान मालिक चेतन ब्राग्टा को लगता है कि किसानों को इस बात का डर है कि पिछले साल भी उनके जेब पर असर पड़ा था।  लेकिन इस साल, तीव्रता अधिक है जो चिंताजनक है।