Home एग्रीकल्चर न्यूज किसानों को पराली प्रबंधन के उपकरण खरीदने के लिए 588 करोड़ रुपये की सब्सिडी
किसानों को पराली प्रबंधन के उपकरण खरीदने के लिए 588 करोड़ रुपये की सब्सिडी
किसानों को पराली प्रबंधन के उपकरण खरीदने के लिए 588 करोड़ रुपये की सब्सिडी

किसानों को पराली प्रबंधन के उपकरण खरीदने के लिए 588 करोड़ रुपये की सब्सिडी

पराली नहीं जलाने को लेकर किसानों में जागरूकता बढ़ी है। वर्ष 2018 में पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली के 4,500 गांवों ने पराली प्रबंधन को अपनाया है। पराली प्रबंधन की मशीन खरीदने के लिए केंद्र सरकार किसानों को 2019 में 588 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी कर चुकी है। पिछले साल यह रकम 565 करोड़ रुपये थी।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने मंगलवार को दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि पराली को खेतों में न जलाकर उसे आमदनी का जरिया बनाएं। इससे वायु प्रदूषण में तो कमी आएगी ही, खेत में पानी की भी बचत होगी।

वर्ष 2018 में 4,500 गांवों ने अपनाया पराली प्रबंधन

उन्होंने कहा कि अब लोग समझने लगे हैं कि पराली जलाने से उनकी जमीन की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। अवशेषों को खेत में ही मिलाएंगे तो वे खाद का काम करेंगे, इससे उर्वरकों की बचत होगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में 4,500 गांव पूरी से तरह पराली का प्रबंधन करने लगे, जबकि इसके पिछले साल यह आंकड़ा केवल 100 था।

पराली प्रबंधन के लिए 50 से 80 फीसदी सब्सिडी

उन्होंने बताया कि पराली जलाने के मामलों में वर्ष 2018 के दौरान हरियाणा में 40 से 45 फीसदी की कमी आई है। पंजाब में ऐसे मामले 14 से 15 फीसदी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 से 29 फीसदी कम हुए हैं। उन्होंने कहा कि 2019 में सरकार की 55,118कृषि उपकरणों पर किसानों को सब्सिडी देने की योजना है। इसके लिए केंद्र सरकार 588 करोड़ रुपये सब्सिडी के जारी कर चुकी है। सरकार अत्याधुनिक मशीनों की खरीद पर 50 से 80 फीसदी तक सब्सिडी दे रही है। सहकारी संगठनों को 80 फीसदी तक और किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है।

पराली खेत में मिलाने से उर्वरता बढ़ती है

उन्होंने बताया कि पराली को खेत में मिलाने से कार्बन, फॉस्फोरस आदि की मात्रा में बढ़ोतरी होती है। धान की कटाई के बाद सीधे हैप्पी सीडर से बुआई करने पर उत्पादकता में 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी होती है, इससे किसानों की आमदनी 20 से 25फीसदी ज्यादा होती है। इससे सिंचाई में भी 20 से 25 फीसदी की बचत होती है। देश में हर साल करीब 230 लाख टन पराली (गेहूं और धान) जलाई जाती है। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली को मिलाकर करीब 8 लाख हेक्टेयर में पराली प्रबंधन हो चुका है।

केवीके राज्य सरकारों के साथ मिलकर कर रहे हैं काम

उन्होंने बताया कि पराली प्रबंधन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। पिछले साल 30 हजार से ज्यादा किसानों को इसका प्रशिक्षण दिया गया। चालू साल में उम्मीद है कि हरियाणा पूरी तरह से पराली प्रबंधन को अपना लेगा। पंजाब और पश्चिमी उत्तर में भी पराली जलाने में कमी आएगी।