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नजरिया: मध्यप्रदेश के कृषि-सिंचाई क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि
नजरिया: मध्यप्रदेश के कृषि-सिंचाई क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि

नजरिया: मध्यप्रदेश के कृषि-सिंचाई क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि

लगभग डेढ़ दो दशक पहले तक बीमारू और पिछड़े राज्य की श्रेणी में आना वाला मध्यप्रदेश अब विकास की बहार वाला राज्य है। पिछले 17 सालों में विकास की पगडंडियों से होते हुए अब आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप पर प्रदेश चल रहा है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूती देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने हर क्षेत्र के विस्तार और विकास के अनुकूल वातावरण निर्मित किया है। प्रदेश में एक तरफ जहां उद्योगों का जाल बिछाकर विकास के नये आयाम स्थापित किये जा रहे हैं तो वहीं कृषि और किसानों को समृद्ध और समर्थ बनाना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। केन्द्र के सहयोग और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार की कृषि कल्याण की विभिन्न योजनाओं के परिणाम स्वरूप ही मध्यप्रदेश को लगातार 7 बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

मध्यप्रदेश के लिए कृषि वास्तविक अर्थों में जीवन रेखा है, और अन्नदाता प्रदेश के मजबूत आधार स्तंभ हैं।  प्रदेश सरकार किसानों के लिए बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने के साथ ही कृषि उत्पादन क्षेत्र और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और किसानों के सतत परिश्रम से प्रदेश का कुल कृषि क्षेत्र अब ढ़ाई करोड़ हेक्टेयर से भी अधिक हो गया है। प्रदेश के कृषि क्षेत्र में विस्तार होने से कृषि उत्पादन भी बढ़ा है। अब प्रदेश का कुल कृषि उत्पादन साढ़े छ: करोड़ मीट्रिक टन से अधिक पर पहुंच गया है।  प्रदेश में कृषि क्षेत्र और कृषि उत्पादन बढ़ाने में केन्द्र और राज्य सरकार की किसान कल्याण से जुड़ी योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रदेश के किसान को सरकार से मिल रहे संबंल के कारण वो निश्चिंत होकर खेती कर रहा है और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। किसानों को 2021-22 में शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर 14 हजार 428 करोड़ के फसल ऋण उपलब्ध कराया गया है जो पिछले वर्ष से 9 प्रतिशत अधिक है।

एक वक्त वह भी था जब प्रदेश में सिंचाई के साधन और संभावनाओं की कमी ने किसानों के सामने फसलों के अस्तित्व का सवाल खड़ा कर दिया था।  मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह की सरकार के निरंतर प्रयासों से आज प्रदेश में न केवल सिंचाई के संसाधन विकसित हुये बल्कि सिंचाई क्षेत्र भी निरंतर बढ़ रहा है। सूबे में पहले 6 से 7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती थी, लेकिन पिछले डेढ़ दशक में यह बढ़कर 43 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता निर्मित हो चुकी है और इसे 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने के लक्ष्य के साथ मध्यप्रदेश सरकार इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।  सरकारी और निजी दोनों साधनों से इस वक्त प्रदेश में लगभग एक करोड़ आठ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है. भरपूर सिंचाई से ही मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। इसी का परिणाम है कि गेहूं उत्पादन में मध्यप्रदेश ने पंजाब को पीछे छोड़ दिया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की प्राथमिकता सिंचाई की सुविधाएं और अधिक बढ़ाने की हैं क्योंकि इसी से कृषि की काया पलटी है। सरकार 2022 में 11 परियोजनाएं पूर्ण कर 1.62 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई क्षमता बढ़ाने का प्रयास सरकार कर रही है। 

प्रदेश के किसानों को फसलों की अच्छी पैदावार के लिए सरकार उत्तम गुणवत्ता वाले खाद-बीज उपलब्ध करा रही है तो सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में बिजली देने की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है। दुर्भाग्यवश अगर किसान की फसल को कोई नुकसान पहुंचता है तो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से उसकी भरपाई की जा रही है। प्रदेश में अब तक 73  लाख 69 हजार से अधिक किसानों को फसल बीमा की राशि का भुगतान किया जा चुका है। प्रदेश सरकार किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी कर रही है। साथ ही मंडी के बाहर भी किसानों को अपनी फसल बेचने की आजादी मिली है। राज्य सरकार का फोकस किसानों की आय को दोगुनी करने के साथ ही कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने का है। प्रदेश के किसानों को सशक्त,सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है।
मध्यप्रदेश के कृषि-सिंचाई क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि 



(लेखक सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार में डीन और विभागाध्यक्ष हैं। यहां व्यक्त विचार निजी हैं।)