Home एग्रीकल्चर इंटरनेशनल पहली तिमाही में दलहन आयात में 57 फीसदी की भारी बढ़ोतरी
पहली तिमाही में दलहन आयात में 57 फीसदी की भारी बढ़ोतरी
पहली तिमाही में दलहन आयात में 57 फीसदी की भारी बढ़ोतरी

पहली तिमाही में दलहन आयात में 57 फीसदी की भारी बढ़ोतरी

आयात की मात्रा तय करने और आयात शुल्क में बढ़ोतरी करने के बावजूद दालों का आयात घटने के बजाए बढ़ रहा है। इसका खमियाजा दाल उगाने वाले किसानों पर पड़ रहा है। किसानों को उत्पादक मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे दाम पर दालें बेचनी पड़ रही हैं।

चालू वित्त वर्ष 2019-20 के पहले तीन महीने, अप्रैल-जून में दालों का आयात 57 फीसदी बढ़ गया है। इस दौरान 5.61 लाख टन दालों का आयात हुआ जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में 3.57 लाख टन का आयात हुआ था। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मूल्य के हिसाब से तो आयात में 74 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल-जून में 1,681.90 करोड़ रुपये का आयात हुआ जबकि 2018-19 की समान अवधि में 969 करोड़ रुपये का आयात हुआ था।

पहली तिमाही में ही मटर का आयात तय मात्रा से ज्यादा

केंद्र सरकार ने 2019-20 के लिए मटर के आयात की दो लाख टन की मात्रा तय कर रखी है। सूत्रों के अनुसार पहले तीन महीनों में ही 2.41 लाख टन मटर का आयात हो चुका है। दिल्ली के दलहन कारोबारी राधाकिशन गुप्ता ने बताया कि कई आयातकों ने मद्रास हाई कोर्ट से स्टे ले लिया था, जिस कारण आयात तय मात्रा से ज्यादा हो चुका है। उन्होंने बताया कि मटर के साथ मसूर का भी ज्यादा आयात हुआ है। मसूर पर 30 फीसदी आयात शुल्क होने के बावजूद कनाडा की मसूर मुंबई बंदरगाह पर 4,000 से 4,050 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच है जबकि सरकार ने मसूर का एसमएसपी 4,475 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने उड़द और मूंग के डेढ़-डेढ़ लाख टन आयात की अनुमति दी है। अरहर का आयात 4 लाख टन तक किया जा सकता है। इसके साथ ही मोजाम्बिक से सार्वजनिक कंपनियों के माध्यम से 1.75 लाख टन अरहर के आयात की भी अनुमति है।

मसूर और मटर का ज्यादा हो रहा है आयात

कर्नाटक की गुलबर्गा मंडी के दलहन कारोबारी सीएस नादर ने बताया कि इस समय मसूर और मटर का आयात ज्यादा मात्रा में हो रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय बंदरगाह पर आयातित अरहर के भाव 715 डॉलर प्रति टन हैं। महीनेभर में इनकी कीमतों में 60 से 65 डॉलर प्रति टन की गिरावट आ चुकी है। आयातित उड़द के भाव 535 डॉलर और मूंग के 830 से 860 डॉलर प्रति टन हैं। उन्होंने बताया कि घरेलू मंडियों में अरहर की कीमत 5,600 से 5,700 रुपये और उड़द की 4,600 से 5,200 रुपये प्रति क्विंटल है। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए अरहर का एमएसपी 5,800 रुपये और उड़द का 5,700 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।

दलहन उत्पादन में आई कमी

पिछले साल देश में दालों का रिकार्ड उत्पादन हुआ था, जिससे आयात में तो कमी आई थी, लेकिन किसानों को दालें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे भाव पर बेचनी पड़ी थी। इस बार किसानों ने दलहन की बुआई कम कर दी जिसका असर उत्पादन पर पड़ा है। फसल सीजन 2018-19 में दालों का उत्पादन 234 लाख टन ही होने का अनुमान है जो पिछले साल के 254.2 लाख टन से 7.94 फीसदी कम है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना का उत्पादन पिछले साल के 113.8 लाख टन से घटकर 101.3 लाख टन रहने का अनुमान है। इसी तरह खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर का उत्पादन पिछले साल के 42.9 लाख टन से घटकर 35.9 लाख टन रहने के आसार हैं। उड़द और मूंग का उत्पादन 32.6 और 23.5 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इनका उत्पादन क्रमश: 34.9 और 20.2 लाख टन का हुआ था। मसूर का उत्पादन पिछले साल के 16.2 लाख टन से घटकर 15.6 लाख टन रहने के आसार हैं।