Home एग्रीकल्चर इंटरनेशनल सस्ते मिल्क पाउडर आयात से किसानों को होगा नुकसान - डेयरी उद्योग
सस्ते मिल्क पाउडर आयात से किसानों को होगा नुकसान - डेयरी उद्योग
सस्ते मिल्क पाउडर आयात से किसानों को होगा नुकसान - डेयरी उद्योग

सस्ते मिल्क पाउडर आयात से किसानों को होगा नुकसान - डेयरी उद्योग

कोराना वायरस के कारण होटल, रेस्तरा, कैंटीन आदि बंद होने के कारण दूध और दूध से बने उत्पादों की मांग कम हो जाने के बाद घरेलू डेयरी उद्योग ने खपत के बाद बचे हुए दूध (सरप्लस) का उपयोग स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) और बटर बनाने में किया। लेकिन हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) के तहत 10,000 टन मिल्क पाउडर आयात की अनुमति देने के बाद उनकी परेशानी बढ़ गई।

डेयरी उद्योग के अनुसार यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब घरेलू बाजार में एसएमपी का पर्याप्त भंडार है, साथ ही आगे दूध का फ्लश सीजन शुरू होने वाला है। डेयरी कारोबारी कहते हैं कि मिल्क पाउडर आयात से देश के किसानों को नुकसान होगा। देश में डेयरी उत्पादों के प्रमुख ब्रांड अमूल, गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक डॉ. आर. एस. सोढ़ी कहते हैं कि सस्ते आयात शुल्क पर मिल्क पाउडर का फैसला असमय लिया गया फैसला है। डॉ. सोढ़ी ने बताया कि भारत में दूध उत्पादन लागत के मुकाबले विदेशों में दुग्ध की उत्पादन लागत कम आती है, इसलिए सस्ते मिल्क पाउडर आयात का प्रभाव आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा।

डेयरी उद्योग अतिरिक्त दूध का उपयोग एसएमपी बनाने में कर रहा है

उन्होंने कहा, मिठाई और आइस्क्रीम में दूध की खपत कम होने से हमारे पास दूध की खपत के मुकाबले 15 फीसदी आपूर्ति अधिक हो रही है इसलिए जो दूध खपत से ज्यादा आ रहा है उसका उपयोग मिल्क पाउडर और बटर बनाने में हो रहा है, जिसका बाजार पहले से मिल्क पाउडर की मांग सुस्त है इसके बावजूद सरकार ने सस्ते आयात शुल्क पर मिल्क पाउडर के आयात की अनुमति दे दी है।

होटल, रेस्तरा, कैंटीन में दूध की मांग अभी भी महज 10-15 फीसदी ही है

कोरोना काल में हलवाई की दुकानों, कैंटीन, होटल, रेस्तरा आदि बंद होने के कारण दूध की खपत पर असर पड़ा है। निजी डेयरी कंपनी आनंदा डेयरी के चेयरमैन राधेश्याम दीक्षित ने कहा कि होटल, रेस्तरा, कैंटीन में दूध की मांग अभी भी महज 10 से 15 फीसदी की है जबकि इस सेगमेंट में दूध की खपत करीब 25 फीसदी तक होती है। उन्होंने कहा कि पहले से ही किसानों को दूध का उचित भाव नहीं मिल रहा है और अगर विदेशों से मिल्क पाउडर आएगा तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।

15 फीसदी आयात शुल्क पर 10,000 टन मिल्क पाउडर के आयात की दी है अनुमति

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा 23 जून को जारी अधिसूचना के अनुसार, 15 फीसदी आयात शुल्क पर टैरिफ रेट कोटा के तहत 10,000 टन मिल्क पाउडर का आयात करने की अनुमति दी गई है। अधिसूचना के अनुसार, पाउडर या अन्य किसी ठोस के रूप में दूध या क्रीम जिसमें वसा की मात्रा भार के हिसाब से 1.5 फीसदी से अधिक न हो या जिसमें मीठा करने वाला पदार्थ न हो। कोरोनावायरस के प्रकोप पर लगाम लगाने के मकसद से 25 मार्च से जब देशभर में पूर्णबंदी कर दी गई थी तब होटल, रेस्तरा, कैंटीन बंद हो गए थे। हालांकि अब इनके खोलने की अनुमति है, फिर भी कोरोना के गहराते प्रकोप के कारण लोग होटल, रेस्तरा में कम जा रहे हैं। वहीं, शिक्षण संस्थान बंद होने से वहां की कैंटीन भी अभी तक बंद हैं, जिससे देश में दूध की खपत इसकी आपूर्ति के मुकाबले कम हो रही है।

आईएएनएस एजेंसी इनपुट