Home एग्रीकल्चर इंटरनेशनल चालू गन्ना पेराई सीजन में केवल 17.44 लाख टन चीनी का ही हुआ है निर्यात
चालू गन्ना पेराई सीजन में केवल 17.44 लाख टन चीनी का ही हुआ है निर्यात
चालू गन्ना पेराई सीजन में केवल 17.44 लाख टन चीनी का ही हुआ है निर्यात

चालू गन्ना पेराई सीजन में केवल 17.44 लाख टन चीनी का ही हुआ है निर्यात

विदेशी बाजार में चीनी की कीमतें कम होने के कारण निर्यात सीमित मात्रा में ही हो रहा है। पहली अक्टूबर 2018 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2018-19 (अक्टूबर से सितंबर) के दौरान 6 अप्रैल तक केवल 17.44 लाख टन चीनी का ही निर्यात हुआ है, जबकि केंद्र सरकार ने निर्यात का लक्ष्य 50 लाख टन का तय किया हुआ है।

आल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन के अनुसार चालू पेराई सीजन पहली अक्टूबर 2018 से 6 अप्रैल 2019 तक चीनी मिलों ने 21.74 लाख टन चीनी के निर्यात सौदे किए हैं, जिनमें से शिपमेंट केवल 17.44 लाख टन की ही हुई हैं। अभी तक हुए कुल निर्यात में 7,79,983 टन रॉ-शुगर तथा 9,12,458 टन व्हाईट चीनी है। केंद्र सरकार चीनी निर्यात के लिए मिलों को परिवहन पर सब्सिडी दे रही है।

चीनी के कुल निर्यात में बंगलादेश की हिस्सेदारी ज्यादा

उद्योग के अनुसार अभी तक हुए कुल निर्यात में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी बंगलादेश की 20 फीसदी की रही हैं। बंगलादेश ने चालू पेराई सीजन में 3,56,728 टन चीनी का आयात किया है। इसके अलावा श्रीलंका ने 2,87,498 टन, सोमालिया ने 2,12,760 टन और ईरान ने 1,12,500 टन तथा सुडान ने 1,19,401 टन का आयात किया है। इसके अलावा अन्य देशों ने 6,32,138 टन चीनी का आयात किया है।

खपत के मुकाबले उत्पादन ज्यादा

उद्योग के अनुसार चालू पेराई सीजन में 307 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान है जबकि पिछले पेराई सीजन में 325 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। देश में चीनी की सालाना खपत 245 से 250 लाख टन की होती है। ऐसे में घरेलू बाजार में चीनी की कुल उपलब्धता ज्यादा है। चीनी का उत्पादन ज्यादा होने के साथ विदेशी बाजार में भाव में कम होने की वजह से निर्यात सीमित मात्रा में ही हो रहा है। इसी के परिणामस्वरूप गन्ना किसानों का चीनी मिलों पर बकाया भी लगातार बढ़ रहा है। हालांकि केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए कई तरह के कदम भी उठाए हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) 29 रुपये से बढ़ाकर 31 रुपये प्रति किलो किया था।