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सर्दियों की बारिश नहीं होने से तिलहन और दलहन की उत्पादकता होगी प्रभावित

JAN 13 , 2018

सर्दियों की बारिश नहीं होने के साथ ही मौसम में गर्माहट बढ़ने से तिलहनों के साथ ही दलहनी फसलों की उत्पादकता प्रभावित होने की आशंका है। दलहन और तिलहनों की बुवाई सामान्यत: असिचिंत क्षेत्रफल में ज्यादा होती है इसलिए सर्दियों की बारिश इन फसलों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में तटीय कर्नाटक, तटीय महाराष्ट्र, उत्तराखंड, केरल, तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से ऊपर न्यूनतम तापमान बनने की उम्मीद है।
चालू रबी सीजन में दलहन फसलों की बुवाई में तो भारी बढ़ोतरी हुई है, अत: दलहन का कुल उत्पादन ज्यादा होने का अनुमान है। दलहनी फसलों की बुवाई सामान्यत: असिचिंत क्षेत्रों में होती है, अत: सर्दियों की बारिश इनके लिए महत्वपूर्ण होती है, लेकिन चालू रबी में अभी तक बारिश नहीं हुई है, जिससे दलहनी फसलों की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता में कमी आने की आशंका है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार दलहनी फसलों की बुवाई बढ़कर चालू रबी में 160.91 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 154.05 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। चना की बुवाई बढ़कर 105.61 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 97.90 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। मसूर की बुवाई बढ़कर चालू रबी में 17.19 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई केवल 17.16 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2016—17 में चना का उत्पादन 93.3 लाख टन का हुआ था।
तिलहनों की बुवाई चालू रबी में घटकर 78.62 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुवाई 81.61 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। रबी तिलहनों की प्रमुख फसल सरसों की बुवाई घटकर चालू रबी में 66.38 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 69.90 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2016—17 में सरसों का उत्पादन 79.77 लाख टन का हुआ था।
मौसम में गर्माहट बढ़ने और बारिश नहीं होने का असर अन्य रबी फसलों गेहूं के साथ ही मोटे अनाजों की उत्पादकता पर भी पड़ने की आशंका है।


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