Home एग्रीकल्चर एग्री ट्रेड प्री-मानसून की बारिश कम होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ी
प्री-मानसून की बारिश कम होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ी
प्री-मानसून की बारिश कम होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ी

प्री-मानसून की बारिश कम होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ी

कई राज्यों में सूखे जैसे हालात होने के साथ ही प्री-मानसून की बारिश कम होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई 8.14 फीसदी पिछे चल रही हैं। खरीफ की प्रमुख फसल धान के साथ ही दलहन, मोटे अनाज और कपास की बुवाई पिछे चल रही है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में अभी तक 82.20 लाख हेक्टयेर में ही खरीफ फसलों की बुवाई हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 90.34 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। हालांकि खरीफ फसलों की बुवाई अभी शुरूआती चरण में है तथा आगामी दिनों में बुवाई में तेजी आने का अनुमान है।

धान और मोटे अनाजों की बुवाई भी पिछड़ी

खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 4.26 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 5.47 लाख हेक्टेयर में रोपाई हो चुकी थी। दालों की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 1.04 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 2.11 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों की बुवाई पिछले साल के 7.13 लाख हेक्टेयर की तुलना में चालू खरीफ में अभी तक केवल 5.28 लाख हेक्टेयर में ही हुई है।

तिलहन, कपास और गन्ने की बुवाई कम

तिलहन की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 1.04 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 1.79 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। कपास की बुवाई भी चालू खरीफ में पिछले साल के 16.92 लाख हेक्टेयर से घटकर केवल 15.32 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में 49.21 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 50.44 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।