Home एग्रीकल्चर एग्री ट्रेड पहली जनवरी से 14 राज्यों में शुरू होगी राशन पोर्टेबिलिटी-पासवान
पहली जनवरी से 14 राज्यों में शुरू होगी राशन पोर्टेबिलिटी-पासवान
पहली जनवरी से 14 राज्यों में शुरू होगी राशन पोर्टेबिलिटी-पासवान

पहली जनवरी से 14 राज्यों में शुरू होगी राशन पोर्टेबिलिटी-पासवान

देश के 14 राज्यों में पहली जनवरी 2020 से राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी लागू हो जाएगी। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि एक जून 2020 से पूरे देश में वन नेशन-वन राशन कार्ड लागू हो जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 'वन नेशन वन राशन कार्ड' (एक राष्ट्र, एक राशनकार्ड) की जो परिकल्पना की गई है उसे अगले साल जून तक हासिल कर लिया जाएगा।

राज्यों के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रियों तथा सचिवों की बैठक दिल्ली में हुई। बैठक में सरकार ने ई-कॉमर्स नियमों को कड़ाई से लागू करने पर सुझाव मांगे हैं। देश के 14 राज्यों में पीडीएस की दुकानों में सौ फीसदी पीओएस मशीन लग चुकी है। इन राज्यों में एक जनवरी से राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी शुरू होगी। इन राज्यों के लाभार्थी किसी भी जिले में किसी भी पीडीएस दुकान से राशन ले सकते हैं।

प्लास्टिक का विकल्प तलाशने पर विचार के लिए 9 सितंबर को होगी बैठक

प्लास्टिक का विकल्प तलाशने पर विचार करने के लिए 9 सितंबर पर बैठक बुलाई है। बैठक में पानी की बोतल उद्योग से जुड़े लोगों को बुलाया गया है, ताकि प्लास्टिक की बोतल का इस्तेमाल सीमित हो सके। उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) को भी कुछ विकल्प सुझाने के लिए कहा जाएगा। बीआईएस किस तरह से मानकों को तय करता है, उनके कार्यान्वयन और प्रयोगशालाओं के कामकाज को कैसे आंकता है, इसका आकलन करने के लिए दो अलग-अलग बैठकें भी बुलाई गई हैं।

बफर स्टॉक से दलहन और प्याज उठाने की मांग

प्याज और दालों की कीमतों पर भी बैठक में चर्चा हुई। पासवान ने राज्यों से आग्रह किया है कि वह बफर स्टॉक में मौजूद दाल और प्याज को खरीद कर अपने-अपने राज्यों में कम कीमत पर बिक्री करने का बंदोबस्त करें। केन्द्र के पास दालों और प्याज का पर्याप्त भंडार है और राज्यों को उनकी मांग के अनुसार इन वस्तुओं की आपूर्ति की जायेगी। उन्होंने कहा कि 13 राज्य केन्द्र से दालें ले रहे हैं। केंद्र के पास 27 लाख टन दालों और 56,000 टन प्याज का बफर स्टॉक है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम को सरल करने पर मांगे सुझाव

केंद्र सरकार ने राज्यों से छह दशक पुराने आवश्यक वस्तु अधिनियम के कुछ कड़े प्रावधानों को नरम बनाने समेत उसे सरल करने के बारे में सुझाव मांगे हैं। इस समय इसमें कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिनमें मामूली जुर्म में भी जेल की सजा है। राज्य आवश्यक वस्तु अधिनियम को सरल बनाने पर गौर कर सकते हैं, जिसमें दंड के प्रावधानों में संशोधन भी शामिल हैं। इस सरलीकरण से कारोबार में आसानी होगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन की दिशा में प्रयास नीति आयोग के परामर्श से किया जा रहा है ताकि उपभोक्ता संरक्षण के उद्येश्यों से समझौता किए बिना निवेश को बढ़ावा देने और व्यापार के  लक्ष्य को आसानी से पूरा किया जा सके। पिछले महीने, भारतीय कृषि के रूपांतरण विषय पर मुख्यमंत्रियों की उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने आवश्यक वस्तु कानून (ईसीए) में संशोधन का सुझाव देते हुए कहा था कि इन कानूनों को बेहद गंभीर मामलों में ही लागू किया जाना चाहिए।