Home एग्रीकल्चर एग्री ट्रेड वैश्विक भूख सूचकांक में भारत का 102वां स्थान चिंताजनक : नायडू
वैश्विक भूख सूचकांक में भारत का 102वां स्थान चिंताजनक : नायडू
वैश्विक भूख सूचकांक में भारत का 102वां स्थान चिंताजनक : नायडू

वैश्विक भूख सूचकांक में भारत का 102वां स्थान चिंताजनक : नायडू

उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने आज कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि होने के बावजूद भारत वैश्विक भूख सूचकांक में 102वें पायदान पर है, जो चिंता का विषय है।

नायडू ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में उच्च प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल होने से खाद्यान्न के मामले में देश आज आत्मनिर्भर हो गया है, लेकिन वैश्विक भूख सूचकांक में भारत का 102वें स्थान पर होना चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन के बावजूद देश में भोजन की कमी और कुपोषण की समस्या बनी हुई है जो चिन्ताजनक है। खाद्य सुरक्षा के साथ साथ पोषण सुरक्षा बढ़ाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि अनाजों में प्रोटीन और विटामिन की मात्रा बढ़ानी होगी। उन्होंने फसलों की कम उत्पादकता पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि छोटे से देश वियतनाम में भारत से धान गया था जिसकी उत्पादकता वहां यहां की तुलना में 10 गुना अधिक है।

उपराष्ट्रपति ने कहा हम सभी राजनेताओं, नीति निर्माताओं, सांसदों और इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों, विश्वविद्यालयों के अनुसंधान केंद्रों को गंभीरता से इस पर विचार करना चाहिए कि हम अभी भी वैश्विक भूख सूचकांक में क्यों 102वें स्थान पर हैं। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू शुक्रवार को यहां भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के 58वें दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे।

आईएआरआई ने गेहूं की उन्नत किस्म तैयार कर हरित क्रांति का सूत्रपात किया

नायडू ने संस्थान की प्रशंसा करते हुए कहा कि आईएआरआई ने गेहूं की उन्नत किस्म तैयार करके देश में हरित क्रांति का सूत्रपात किया। हरित क्रांति के बाद भी कृषि के क्षेत्र में संस्थान की उपलब्धि उल्लेखनीय है, जिसकी बदौलत देश में गेहूं का उत्पादन 10.1 करोड़ टन और धान का उत्पादन 11.5 करोड़ टन तक चला गया है। खाद्यान्नों के उत्पादन में भारत की उपलब्धि का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, देश में खाद्यान्नों का उत्पादन जो 1950-51 में महज 508.2 लाख टन था, वह 2018-19 में बढ़कर 28.33 करोड़ टन हो गया है। यह अत्यंत उल्लेखनीय उपलब्धि है।

संस्थान द्वारा विकसित उन्नत किस्मों और प्रौद्योगिकी को दिया श्रेय

उपराष्ट्रपति ने इस उपलब्धि का श्रेय संस्थान को देते हुए कहा कि संस्थान द्वारा विकसित की गई फसलों की उन्नत किस्मों और प्रौद्योगिकी से ही यह उपलब्धि हासिल हुई है। दीक्षांत समारोह में संस्थान की 26 विधाओं में कुल 242 छात्रों व शोधार्थियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषयों में स्नातकोत्तर की उपाधि व पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। इस मौके पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी, केंद्रीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्रा समेत संस्थान के अधिकारी, प्रोफेसर कृषि वैज्ञानिक और स्नातकोत्तर के छात्र-छात्राएं मौजूद थे।