Home एग्रीकल्चर एग्री ट्रेड समर्थन मूल्य से 600 रुपये नीचे दाम पर अरहर बेचने को मजबूर हैं किसान
समर्थन मूल्य से 600 रुपये नीचे दाम पर अरहर बेचने को मजबूर हैं किसान
समर्थन मूल्य से 600 रुपये नीचे दाम पर अरहर बेचने को मजबूर हैं किसान

समर्थन मूल्य से 600 रुपये नीचे दाम पर अरहर बेचने को मजबूर हैं किसान

बेमौसम बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान के बाद अब अरहर किसानों को अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल नीचे दाम पर बेचनी पड़ रही है। कर्नाटक की गुलबर्गा मंडी में अरहर 5,200 से 5,300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रही है जबकि चालू खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए केंद्र सरकार ने अरहर का एमएसपी 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।

गुलबर्गा मंडी के दलहन कारोबारी एस चंद्रशेखर नादर ने बताया कि बेमौसम बारिश और बाढ़ से कर्नाटक और महाराष्ट्र में अरहर की फसल को नुकसान हुआ था, जिस कारण सरकार ने उत्पादन अनुमान में भी कमी की है। उन्होंने बताया कि आयातित अरहर सस्ती होने के कारण उत्पादक राज्यों की मंडियों में भाव समर्थन मूल्य से नीचे बने हुए हैं, जिस कारण किसानों को समर्थन मूल्य से 500 से 600 रुपये नीचे दाम पर अरहर बेचनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि राज्य की मंडियों से समर्थन मूल्य पर अरहर की खरीद के लिए किसानों के पंजीकरण का काम चल रहा है, लेकिन सरकार एक किसान से केवल 10 क्विंटल की खरीद करेगी। अत: सीमित मात्रा में खरीद करने के कारण भाव में तेजी की संभावना नहीं है।

चालू वित्त वर्ष में 5.75 लाख टन आयात की अनुमति

दिल्ली की लारेंस रोड़ मंडी के दलहन कारोबारी राधाकिशन गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में अरहर के भाव 5,300 से 5,350 रुपये प्रति क्विंटल हैं। कर्नाटक के साथ ही महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की मंडियों में दैनिक आवक बढ़ रही है। केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 5.75 लाख टन अरहर (चार लाख टन दाल मिलों के माध्यम से और 1.75 लाख टन सरकारी सत्र पर) आयात की अनुमति दी हुई है, जिसमें से दाल मिलें अपने कोटे का आयात कर चुकी हैं तथा सरकार सत्र पर भी करीब एक लाख टन लेमन अरहर का आयात हो चुका है। उत्पादक मंडियों में आगे दैनिक आवक और बढ़ेगी, इसलिए भाव में तेजी की संभावना नहीं है।

समर्थन मूल्य पर 5,45,573 टन अरहर खरीद करने का लक्ष्य

नेफेड एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार चालू सीजन में कर्नाटक से समर्थन मूल्य पर 1,82,875 टन अरहर की खरीद की जायेगी, इसके अलावा गुजरात से 69,350 टन की खरीद समर्थन मूल्य पर की जायेगी। इन राज्यों से समर्थन मूल्य पर पहली जनवरी 2020 से खरीद शुरू की जायेगी। सूत्रों के अनुसार चालू सीजन में उत्पादक राज्यों की मंडियों से समर्थन मूल्य पर कुल 5,45,573 टन अरहर खरीद करने का लक्ष्य है।

उत्पादन अनुमान कम

कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2019-20 में अरहर का उत्पादन घटकर 35.4 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि इसके पिछले साल 35.9 लाख टन का उत्पादन हुआ था। फसल सीजन 2017-18 में देश में रिकार्ड 42.9 लाख टन अरहर का उत्पादन हुआ था।