Home एग्रीकल्चर एग्री ट्रेड चीनी उद्योग के लिए केंद्र ने एथेनॉल की कीमत 29 पैसे से 1.84 रुपये लीटर तक बढ़ाई
चीनी उद्योग के लिए केंद्र ने एथेनॉल की कीमत 29 पैसे से 1.84 रुपये लीटर तक बढ़ाई
चीनी उद्योग के लिए केंद्र ने एथेनॉल की कीमत 29 पैसे से 1.84 रुपये लीटर तक बढ़ाई

चीनी उद्योग के लिए केंद्र ने एथेनॉल की कीमत 29 पैसे से 1.84 रुपये लीटर तक बढ़ाई

पहली अक्टूबर 2019 से शुरू होने वाले गन्ना पेराई सीजन 2019-20 (अक्टूबर से सितंबर) के लिए केंद्र सरकार ने एथेनॉल की कीमतों में 29 पैसे से 1.84 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने सी-ग्रेड एथेनॉल की कीमत 29 पैसे बढ़ाकर 43.75 रुपये प्रति लीटर और बी-ग्रेड एथेनॉल की कीमत को 1.84 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 54.27 रुपये प्रति लीटर तय कर दिया। गन्ने के रस से सीधे बनने वाले एथेनॉल की कीमत में भी 29 पैसे की बढ़ोतरी कर भाव 59.48 रुपये प्रति लीटर तय किया गया।

आगामी पेराई सीजन में 260 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादन का अनुमान

सीसीईए की बैठक के बाद पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी की है। उन्होंने बताया कि आगामी पेराई सीजन में चीनी मिलों द्वारा करीब 260 करोड़ लीटर एथेनॉल की सप्लाई का अनुमान है। उन्होंने बताया कि सी-ग्रेड, बी-ग्रेड के साथ ही चीनी के रस से सीधे एथेनॉल के बाद अब केंद्र सरकार ने चीनी से बनने वाले एथेनॉल की खरीद का भी निर्णय लिया है। इससे उद्योग के साथ ही गन्ना किसानों को भी लाभ मिलेगा।

चीनी से बने हुए एथेनॉल की खरीद भी करेगी सरकार

उन्होंने बताया कि जो चीनी मिलें सीधे गन्ने के रस से एथेनॉल का उत्पादन करने की क्षमता तैयार करती है, उन्हें सरकार यह गारंटी देती है कि हर साल एथेनॉल के भाव में बदलाव किया जायेगा। उन्होंने बताया कि आगामी पेराई सीजन में पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग 7 फीसदी से ज्यादा करने की योजना है। केंद्र सरकार द्वारा तय 10 फीसदी अनिवार्य ब्लेंडिंग के लिए सालाना करीब 330 करोड़ लीटर एथेनॉल की जरूरत है।

चीनी का 40 लाख टन का बफर स्टॉक बनाने का निर्णय

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र सरकार ने 40 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनाने का निर्णय लिया है, जिस पर 1,674 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसके अलावा 60 लाख टन चीनी के निर्यात पर 6,268 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जायेगी, जिस पर पहले ही फैसला हो चुका है। उन्होंने कहा इसका मकसद यही है कि घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में इतनी गिरावट नहीं आ पाये, कि किसानों को नुकसान हो।

सितंबर 2018 में सरकार ने बढ़ाये थे एथेनॉल के दाम

केंद्र सरकार ने सितंबर 2018 में भी एथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। पेराई सीजन 2018-19 में सी-ग्रेड एथेनॉल का भाव 43.75 रुपये, बी-ग्रेड एथेनॉल का भाव 52.43 रुपये प्रति लीटर था। इससे पहले जून 2018 में 8,500 करोड़ रुपये का पैकेज चीनी उद्योग को दिया था, जिसमें 4,440 करोड़ रुपये सस्ते कर्ज के रूप में एथेनॉल की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए दिए गए थे। देश में 9,106 करोड़ रुपये की 174 एथेनॉल परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। पहले चरण में 2,369 करोड़ रुपये की 34 परियोजनाएं उत्तर प्रदेश में बन रही है, जबकि दूसरे चरण में 563 करोड़ रुपये की छह परियोजनाएं उत्तर प्रदेश के लिये स्वीकृत हुई हैं।

सीधे गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने में मदद मिलेगी

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने केंद्र सरकार द्वारा बी-ग्रेड एथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी के फैसले को अच्छा कदम बताते हुए कहा है कि इससे सीधे गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने में मदद मिलेगी, जिससे आगामी पेराई सीजन में पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग जोकि इस समय 6 फीसदी के करीब है, इसे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे उद्योग के साथ ही किसानों को भी फायदा मिलेगा। वर्ष 2022 तक पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग अनिवार्य 10 फीसदी तक होने का अनुमान है।