Home एग्रीकल्चर एग्री बिजनेस पतंजलि ने रूचि सोया को लेने के लिए 4,350 करोड़ रुपये की बोली लगाई
पतंजलि ने रूचि सोया को लेने के लिए 4,350 करोड़ रुपये की बोली लगाई
पतंजलि ने रूचि सोया को लेने के लिए 4,350 करोड़ रुपये की बोली लगाई

पतंजलि ने रूचि सोया को लेने के लिए 4,350 करोड़ रुपये की बोली लगाई

योगगुरु रामदेव के मालिकाना हक वाली पतंजलि आयुर्वेद ने दिवालिया फर्म रुचि सोया के लिए अपनी बोली को 200 करोड़ रुपये बढ़ाकर 4,350 करोड़ रुपये कर दी है और यह रकम कंपनी बैंकों को अग्रिम नकद के तौर पर देगी।

पतंजलि के प्रवक्ता एस.के. तिजारावाला ने कहा कि हमने 4,160 करोड़ रुपये के पहले के प्रस्ताव से अपनी बोली को संशोधित कर 4,350 करोड़ रुपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसानों और उपभोक्ताओं सहित सभी हितधारकों के हित में लिया गया है। सूत्रों ने कहा कि पतंजलि के संशोधित प्रस्ताव पर विचार करने के लिए कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) अगले हफ्ते बैठक कर सकती है। शैलेन्द्र अजमेरा को एनसीएलटी द्वारा दिवाला और दिवालियापन संहिता के तहत लेनदारों स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और डीबीएस बैंक के आवेदन पर रिज़ॉल्यूशन पेशेवर (आरपी) नियुक्त किया गया था।

पतंजलि ने पहले 4,100 करोड़ रुपये की लगाई थी बोली

सूत्रों के मुताबिक पिछले साल अगस्त में अदाणी विल्मर ने 4,300 करोड़ रुपये की पेशकश की थी लेकिन समाधान प्रक्रिया में देरी का हवाला देते हुए इस साल जनवरी में इस पेशकश को वापस ले लिया। पतंजलि ने पहले 4,100 करोड़ रुपये की पेशकश की थी। अदाणी ने भी रुचि सोया में 1,700 करोड़ रुपये अतिरिक्त निवेश का प्रस्ताव किया था।

रुचि सोया की बिक्री में आई है गिरावट

रुचि सोया का कुल कर्ज 12,000 करोड़ रुपये पहुंच गया है जबकि बिक्री में पिछले चार साल में भारी गिरावट आई है। 2014-15 में कंपनी की बिक्री 31,500 करोड़ रुपये थी जो 2017-18 में गिरकर 12,000 करोड़ रुपये रह गई। एक बैंकिंग सूत्र ने बताया कि पतंजलि की संशोधित पेशकश से, एक साल देर से ही सही, रुचि सोया के अधिग्रहण का रास्ता कुछ हद तक साफ हो गया है। कर्ज में डूबी इस फर्म के पास कई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं और इसके प्रमुख ब्रांडों में न्यूट्रेला, महाकोश, सनरिच, रूचि स्टार और रूचि गोल्ड शामिल हैं।

वर्ष 2017 में किया था दिवालिया प्रक्रिया के लिए आवेदन

पतंजलि और अदाणी विल्मर सहित करीब दो दर्जन कंपनियों ने रुचि सोया पर बोली लगाई थी। इनमें केकेआर और एऑन कैपिटल जैसी निजी इक्विटी कंपनियों और आईटीसी, गोदरेज एग्रोवेट तथा इमामी जैसी दिग्गज एफएमसीजी कंपनियां शामिल थीं। उद्योग के जानकारों का कहना है कि रुचि सोया के पास पांच बंदरगाहों के पास प्रसंस्करण संयंत्र हैं और यही वजह है कि कई कंपनियों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई थी। इंदौर की रुचि सोया कभी देश में खाद्य तेल बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी थी। उसने 2017 में कंपनी ने दिवालिया प्रक्रिया के लिए आवेदन दिया था।